Anand Ki Khoj (आनंद की खोज)

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"मनुष्य के मन पर शब्दों का भार है; और शब्दों का भार ही उसकी मानसिक गुलामी भी है। और जब तक शब्दों की दीवालों को तोड़ने में कोई समर्थ न हो, तब तक वह सत्य को भी न जान सकेगा, न आनंद को, न आत्मा को। सत्य की खोज में--और सत्य की खोज ही जीवन की खोज है--स्वतंत्रता सबसे पहली शर्त है। जिसका मन गुलाम है, वह और कहीं भला पहुंच जाए, परमात्मा तक पहुंचने की उसकी कोई संभावना नहीं है। जिन्होंने अपने चित्त को सारे बंधनों से स्वतंत्र किया है, केवल वे ही आत्माएं स्वयं को, सत्य को और सर्वात्मा को जानने में समर्थ हो पाती हैं।"
Title means roughly, "The Search for Bliss". No trace of present or past hard copy could be found for this collection of talks. And there is no information in the description, which is only a sampling of Osho's words. The only way we know it exists is an audio offering at, of four mp3s. Thus there are at least four talks, and may once have been more. See discussion for an audio TOC.
This is a part of 10 ch.-edition of Antar Ki Khoj (अंतर की खोज), for more info see Shifting content in Hindi books (source document).
time period of Osho's original talks/writings
unknown : timeline
number of discourses/chapters