Anand Ki Khoj (आनंद की खोज)

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"मनुष्य के मन पर शब्दों का भार है; और शब्दों का भार ही उसकी मानसिक गुलामी भी है। और जब तक शब्दों की दीवालों को तोड़ने में कोई समर्थ न हो, तब तक वह सत्य को भी न जान सकेगा, न आनंद को, न आत्मा को। सत्य की खोज में--और सत्य की खोज ही जीवन की खोज है--स्वतंत्रता सबसे पहली शर्त है। जिसका मन गुलाम है, वह और कहीं भला पहुंच जाए, परमात्मा तक पहुंचने की उसकी कोई संभावना नहीं है। जिन्होंने अपने चित्त को सारे बंधनों से स्वतंत्र किया है, केवल वे ही आत्माएं स्वयं को, सत्य को और सर्वात्मा को जानने में समर्थ हो पाती हैं।"
notes
Title means roughly, "The Search for Bliss". No trace of present or past hard copy could be found for this collection of talks. At least two talks in Ahmedabad. See discussion for events and TOC.
This series also is available as is the part of Antar Ki Khoj (अंतर की खोज): ch.1-2, 9-10.
Chapter 3 previously published as ch.6 (of 10) of Jeevan Kranti Ke Sutra (जीवन क्रांति के सूत्र).
time period of Osho's original talks/writings
Aug 26, 1968 + ?** : timeline
number of discourses/chapters
4


editions