Jin-Sutra, Bhag 1 (जिन-सूत्र, भाग एक)

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महावीर क्या आए जीवन में
हजारों-हजारों बहारें आ गईं
महावीर गुरु नहीं हैं। महावीर कल्याणमित्र हैं। वे कहते हैं, मैं कुछ कहता हूं, उसे समझ लो; मेरे सहारे लेने की जरूरत नहीं है। मेरी शरण आने से तुम मुक्त न हो जाओगे। मेरी शरण आने से तो नया बंधन निर्मित होगा, क्योंकि दो बने रहेंगे। भक्त और भगवान बना रहेगा। शिष्य और गुरु बना रहेगा। नहीं, दो को तो मिटाना है। इसलिए महावीर ने भगवान शब्द का उपयोग ही नहीं किया। कहा कि भक्त ही भगवान हो जाता है। इसे समझना। विपरीत दिखाई पड़ते हुए भी ये बातें विपरीत नहीं हैं
notes
Talks given in Poona on Mahaveer. This is the first volume of four.
Later published as a 2-volume set. This book matches ch.1-16 of Jin-Sutra, Bhag 1 (जिन-सूत्र, भाग एक) (2). See discussion there for more info.
time period of Osho's original talks/writings
May 11, 1976 to May 26, 1976 : timeline
number of discourses/chapters
16


editions

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Jin-Sutra, Bhag 1 (जिन-सूत्र, भाग एक)

Year of publication : Jul 1976
Publisher : Rajneesh Foundation
Edition no. : 1
ISBN : none
Number of pages : 547
Hardcover / Paperback / Ebook : H
Edition notes :

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Jin-Sutra, Bhag 1 (जिन-सूत्र, भाग एक)

महावीर क्या आए जीवन में   हजारों-हजारों बहारें आ गईं   (Mahaveer kya aae jeevan mein   hajaaron-hajaaron bahaaren aa gaeen)

Year of publication : 2012
Publisher : Divyansh Publications
Edition no. :
ISBN 9789380089751 (click ISBN to buy online)
Number of pages :
Hardcover / Paperback / Ebook : P
Edition notes :

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Jin-Sutra, Bhag 1 (जिन-सूत्र, भाग एक)

Year of publication : 2013
Publisher : OSHO Media International
Edition no. :
ISBN 978-81-7261-276-4 (click ISBN to buy online)
Number of pages : 492
Hardcover / Paperback / Ebook : H
Edition notes :