Letter written on 10 Jun 1970

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Osho wrote many letters in Hindi to Ma Kusum Bharti and her husband Kapil, then of Ludhiana. Most were addressed to Kusum, but always mentioning Kapil too. 27 were published in Prem Ke Swar (प्रेम के स्वर). Sannyas Wiki has images of all but one of those published in PKS, plus three unpublished ones, plus one in English published in The Gateless Gate.

This letter is dated 10th June 1970 and was published in Prem Ke Swar (प्रेम के स्वर) as letter #19. The letterhead is a typical one of those days, showing a simple all-lower-case "acharya rajneesh" at "kamala nehru nagar" in "jabalapur (m. p.)", with his 4-digit phone number and a two-colour Jeevan Jagriti Kendra logo.

acharya rajneesh

kamala nehru nagar : jabalpur (m.p.). phone : 2957

प्यारी कुसुम,
प्रेम। व्दार तो खुलेंगे ही।

लेकिन, खटखटा -- जोर से,पूरी शक्ति से।

अपने को जरा भी बचाना नहीं है।

दांव ही लगाना है तो पूरा लगा।

समग्र।

संपूर्ण।

दांव लगानेवाला भी दांव के पीछे न बचे।

दांव के साथ वह भी दांव पर हो।

तभी व्दार खुलते हैं।

स्वयं को पूरा दिये बिना प्रभु का पाना नहीं है -- नहीं है।

इसे ठीक से समझ लेना है।

फिर तो घटना एक क्षण में ही घट जाती है।

शायद क्षण भी ज्यादा है।

क्षण के भी करोड़वें भाग में घट जाती है।

क्योंकि प्रभु की यात्रा सीढ़ियों की यात्रा नहीं है।

वह क्रमिक (Gradual) नहीं है।

वह तो छलांग (jump) जैसी है।

बस उसमें तो एक ही कदम काफी है।

वह अक्रमिक (Sudden) है।

इसलिए ही तो वह अभी (Now ) और यहीं (HERE) घट सकती है।

कपिल को प्रेम।

असंग को आशीष।

रजनीश के प्रणाम

१०/६/१९७०

Prem Ke Swar 19.jpg


See also
Prem Ke Swar ~ 19 - The event of this letter.
Letters to Kusum and Kapil - Overview page of these letters.