Letter written on 11 Apr 1970 (YPrem)

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Osho wrote many letters in Hindi to Ma Yoga Prem which were published in various letter collections. This one is dated 11th June 1970 and was published in Prem Ke Phool (प्रेम के फूल) as letter #144. The small PS on the reverse side appears not to have been included in Prem Ke Phool, at least according to a pdf of the first edition

The letterhead reads:

acharya rajneesh, followed by
kamala nehru nagar : jabalpur (m.p.). phone : 2957, all in lower-case

The logo in the upper right corner is a Jeevan Jagriti Kendra logo, in two colours. The letterhead is the classic one from the late-Jabalpur period. The letter is written in black ink with the signature in a bright blue-green.

acharya rajneesh

kamala nehru nagar : jabalpur (m.p.). phone : 2957 प्यारी जसु,
प्रेम। सूर्य को पाने की अभीप्सा है, तो जरूर ही पासकेगी।

लेकिन, जलने का साहस चाहिए।

बिना मिटे प्रकाश नहीं मिलता है।

क्योंकि, हमारी अस्मिता ही अंधकार है।

फिर सूर्य बाहर भी तो नहीं है।

भीतर जब सब जलता है, तभी तो वह जलता है।

स्व का जल उठना ही तो प्रकाश है।

अंधकार है मिटने का भय।

आलोक है मिटने के लिए छलांग।

मिट और जान।

खो और पा।

इसीलिए तो मैं प्रेम को प्रार्थना कहता हूँ।

क्योंकि वह मिटने की प्राथमिक शिक्षा है।

रमा को प्रेम।

सबको प्रणाम

रजनीश के प्रणाम

११/४/१९७०

Letter-Jun-11-1970-Yprem-main.jpg

पुनश्चः जो भी टेप उतारले उसे ' पूकांर ' के लिए यहां भेज देना।

Letter-Jun-11-1970-Yprem-PS.jpg


See also
Prem Ke Phool ~ 144 - The event of this letter.