Letter written on 11 Dec 1973

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Letter written to unknown recipient on 11 Dec 1973. This is not original manuscript, but image from the magazine where it is published: Rajneesh Darshan (रजनीश दर्शन), Vol 1 issue 1 (Jan-Feb 1974 issue). Here is missing greetings and letterhead.

ईश्वर है निकटम उस समय जब तुम प्रसन्न हो और तुम्हारे प्राण गीतों से भरे हैं और तुम्हारी आत्मा नृत्य कर रही है।
क्योंकि, यह है परम आनंद और इसलिए आनंदित होकर ही तुम उसे पासकोगे।
त्यागो उदासी और लम्बे चेहरे।
त्यागो यह रुग्ण गंभीरता।
उसके पास जाने का यह ढंग नहीं।
उत्सव ही उसका एकमात्र व्दार है।
रजनीश के प्रणाम
११.१२.१९७३
Rajneesh Darshan mag Jan-Feb 1974 inside page.jpg


See also
Letters to Unknown ~ 04 - The event of this letter.