Letter written on 12 Nov 1970 (YPrem)

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Osho wrote many letters in Hindi to Ma Yoga Prem which were published in various letter collections. This one is dated 12th November 1970 and was published in Antarveena (अंतर्वीणा) as letter #30.

The letterhead is a typical one from the relatively short Churchgate period, similar in design to the long-time Kamala Nehru Nagar letterhead used before Osho moved from Jabalpur to Mumbai. It has a simple all-lower-case "acharya rajneesh" and a two-colour Jeevan Jagriti Kendra logo. His address is in a third colour, a pale blue, and all-caps. The letter is written in black ink with the signature and date in a bright purple.

acharya rajneesh

27, C. C. I. CHAMBERS CHURCHGATE BOMBAY-20 PHONE NO. : 293782

प्रिय योग प्रेम,
प्रेम। भय छोड़।

क्योंकि, भय को पकड़ा कि वह बढ़ा।

उसे पकड़ना हो उसे पानी देना है।

लेकिन,भय छोड़ने का अर्थ उससे लड़ना नहीं है।

लड़ना भी उसे पकड़ना ही है।

भय है -- ऐसा जान।

उससे भाग मत।

पलायन मर कर।

जीवन भय है।

असुरक्षा है।

मृत्यु है।

ऐसा जान।

ऐसा है।

यह सब जीवन का तथ्य है।

भागेंगे कहां ?

बचेंगे कैसे ?

जीवन ऐसा है ही।

इसकी स्वीकृति -- इसका सहज अंगीकार ही भय से मुक्ति है।

भय स्वीकृत है तो फिर भय कहां है ?

मृत्यु स्वीकृत है तो फिर मृत्यु कहां है ?

असुरक्षा स्वीकृत है तो फिर असुरक्षा कहां है ?

जीवन की समग्रता के स्वीकार को ही मैं सन्यास कहता हूँ।

रजनीश के प्रणाम

१२/११/१९७०

Letter-Nov-12-1970-Yprem.jpg


See also
Antarveena ~ 030 - The event of this letter.