Letter written on 13 Dec 1961

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This is one of hundreds of letters Osho wrote to Ma Anandmayee, then known as Madan Kunwar Parakh. It was written on 13th December 1961. The letterhead is his new "professional" letterhead, which has in the top left corner: Acharya Rajneesh / Darshan Vibhag (Philosophy Dept) / Mahakoshal Mahavidhalaya (Mahakoshal University) and in the top right: Nivas (Home) / 115, Napier Town / Jabalpur (Madhyapradesh).

Osho's salutation in this letter is his standard "प्रिय मां" (Priya Maan, Dear Mom, Beloved Mother). There are a couple of the hand-written marks on the page that have been observed in other letters: a blue number (41) in a circle in the top right corner and a second, pale and mirror-image number (66) in the bottom right corner, but no red tick mark.

Letters to Anandmayee 869.jpg

आचार्य रजनीश
दर्शन विभाग
महाकोशल महाविद्यालय

निवास,
११५, नेपियर टाउन
जबलपुर (मध्यप्रदेश)

१३ दिस. १९६१

प्रिय मां,
दोपहर। धूप बड़ी प्रिय है। देरतक आंख बंद किये किरणों की कुनकुनी गरमी लेता रहा हूँ। अब एक साधु आए हैं : दूर पश्चिम के देशों से धर्म का प्रचार करके लौटे हैं।

मैं उनकी बातें सूनता हूँ। चेहरा आक्रमक है और चित्त शांत नहीं मालुम होता है। ऐसा लगता है कि जैसे धर्म बस दूसरों को उपदेश देने के लिए है, अपने काम का उनमें कुछ भी नहीं है।

यही उनसे कहा है। बहुत चौंक गये हैं। क्रोध आंखों में आगया है और बोलने में आवेश है।

मैं शांति से सूनता हूँ। मेरी शांति उनको और भी क्रोधित कर देरही है। साधु का अहंकार प्रबल होजाता है। साधुता भी अहंकार का अलंकार बन गई है। कृष्णमूर्ति का स्मरण आता है। भूलता नहीं तो कहीं उन्होंने किसी प्रसंग में साधु को ‘पवित्र अहंकारी’ कहा है! अब सोचता हूँ कि अहंकार भी क्या पवित्र होसकता है : संभवत: कृष्णमूर्ति मजाक में ही कहे हैं! अहंकार तो अहंकार ही है : धन का हो, पद का हो, ज्ञान का हो, या त्याग का हो। उसके जहर में कोई अंतर नहीं आता है। इससे जो मुक्त नहीं है वह बेचारा बड़ी पीड़ा में है। इसपर मुझे दयाही आती है। मैं सदा सोचता हूँ कि शरीर के बीमारों पर लोग दया करते हैं फिर मन के बीमारों पर क्यों नहीं करते हैं?

शरीर की बीमारी जल्दी चली जाती है मन की बीमारी को जाने में जन्म जन्म लग जाते हैं।

रजनीश के प्रणाम


See also
Letters to Anandmayee ~ 31 - The event of this letter.
Letters to Anandmayee - Overview page of these letters.