Letter written on 13 Mar 1971

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Osho wrote many letters in Hindi to Ma Kusum Bharti and her husband Kapil, then of Ludhiana. Most were addressed to Kusum, but always mentioning Kapil too. 27 were published in Prem Ke Swar (प्रेम के स्वर). Sannyas Wiki has images of all but one of those published in PKS, plus three unpublished ones, plus one in English published in The Gateless Gate.

This letter is dated 13th March 1971 and was published in Prem Ke Swar (प्रेम के स्वर) as letter #27 and also in Pad Ghunghru Bandh (पद घुंघरू बांध) (letter #149). The letterhead is a typical one from the early days of living in Woodland, his principal home during the Bombay era. It has "acharya rajneesh" in all lower-case letters, his address and phone in all-caps in a different colour, and a two-colour Jeevan Jagriti Kendra logo.

acharya rajneesh

A-1 WOODLAND PEDDAR ROAD BOMBAY-26. PHONE: 382184

प्यारी कुसुम,
प्रेम।आकाश से थोड़ा ताल मेल बढ़ा।

आंखों को विराट को पीने दे।

दिन हो या रात -- जब भी मौका मिले आकाश पर ध्यान कर।

आकाश को उतरने दे ह्रदय में।

शीघ्र ही बीच से पर्दा उठने लगेगा।

भीतर और बाहर का आकाश आलिंगन करने लगेगा।

स्वयं के मिटने में इससे सहायता मिलेगी।

अहं के विसर्जन में इससे मार्ग बनेगा।

और यदि अनायास ही आकाश पर ध्यान करते-करते तन-मन नृत्य को आतुर होउठें तो स्वयं को रोकना नहीं -- नाचना।

ह्रदय पूर्वक नाचना।

पागल होकर नाचना।

उस नृत्य से जीवन- रूपांतरण की अनूठी कुंजी हाथ लग जाती है।

क्योंकि नृत्य ही है अस्तित्व।

अस्तित्व के होने का ढंग ही नृत्यमय है।

अनु-परमाणु नृत्य में लीन हैं -- ऊर्जा अनंत रूपों में नृत्य कर रही है।

जीवन नृत्य है।

रजनीश के प्रणाम

१३/३/१९७१

पुनश्चः कपिल को प्रेम। असंग को आशीष।

Prem Ke Swar 27.jpg


See also
Prem Ke Swar ~ 27 - The event of this letter.
Letters to Kusum and Kapil - Overview page of these letters.