Letter written on 14 Aug 1971

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Osho wrote many letters in Hindi to Ma Yoga Prem which were published in various letter collections. This one is dated 14th August 1971 and is not known to have been published.

Letterhead is from Woodland. It reads:

rajneesh (in stylized lower-case Roman letters made to resemble Devanagari script)
A-1 WOODLAND PEDDAR ROAD BOMBAY 26 PHONE 382184 (in Roman all-caps)

The logo in the upper right corner appears to be a stylized Om (). There are a few Woodland letterheads in this general style with subtle variations. The whole letter is written (typed) in black ink except for a bright red signature with a hugely wide marking pen.

rajneesh

A-1 WOODLAND PEDDAR ROAD BOMBAY-26 PHONE 382184

प्रिय आत्मन्,
प्रेम. मैं न भगवान हूं. न तीर्थंकर, न पैगम्बर.

वस्तुतः तो मैं वह हूं ही नहीं.

या,शून्यवत हूं.

किन्तु जबसे स्वयं को शून्य जाना तभी से एक तमाशा भी देख रहा हूं.

क्योंकि तभी से मैं एक दर्पण की भांति हो गया हूं.

और जो भी मेरे पास आता है वही अपनी तस्वीर मुझमें देख लेता है.

इसलिए किसी को मैं भगवान भी दिखाई पड़ता हूं और किसी को शैतान भी.

और इस सब पर मेरे पास हंसने के अतिरिक्त और कोई उपाय नहीं है.

मैं न किसी का समर्थन करता हूं, न विरोध---- क्योंकि वे जो कुछ भी कह रहे हैं, वह स्वयं उनके ही संबंध में है और उससे मेरा कोई भी संबंध नहीं है.

रजनीश के प्रणाम

१४.८.१९७१

Letter-Aug-14-1971-Yprem.jpg


See also
Letters to Ma Yoga Prem ~ 02 - The event of this letter.