Letter written on 15 Dec 1970 (Samadhi)

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Osho wrote many letters in Hindi to Ma Yoga Samadhi which were published in various letter collections. This one is dated 15th December 1970 and was published in Antarveena (अंतर्वीणा) as letter #46. The wiki's image is a photo of a copy, thus it is not the highest quality and it has lost its colours.

The letterhead is a typical one from the relatively short Churchgate period, similar in design to the long-time Kamala Nehru Nagar letterhead used before Osho moved from Jabalpur to Mumbai. It has a simple all-lower-case "acharya rajneesh" and a (formerly) black-and-red Jeevan Jagriti Kendra logo. His address, in all-caps, has been dimmed by the copy process, which does not handle blue well.

acharya rajneesh

27 C C I CHAMBERS CHURCHGATE BOMBAY-20 PHONE 293782

प्रिय योग समाधि,
प्रेम। तेरे लिए जो-भी-संभव-है वह करूंगा।

और, वह भी जो-असंभव-है!

क्योंकि, असंभव तो कुछ भी नहीं है।

मदद तुझे दी जारही है।

अनेक रूपों में।

दृश्य भी -- अदृश्य भी।

उसका अनुभव थी तुझे होता है।

धीरे-धीरे अनुभव और भी स्पष्ट होगा।

अदृश्य को पकड़ने के लिए चित्त को समायोजित (adjust )होने में थोड़ा समय लगता है।

लेकिन, जो भी अनुभव हो, उसे ध्यानपूर्वक देखना।

आंखों को बंद करके।

तो धीरे धीरे तेरी तीसरी आंख (Third Eye )सक्रिय हो उठेगी।

जिन इन्द्रियों से तू अभी परिचित है, अदृश्य में उनका उपयोग नहीं है।

उनकी अपनी सीमा है।

वे दृश्य -- आकार जगत् के लिए चेतना के व्दार हैं।

लेकिन, और भी इंद्रियां हैं।

आंतरिक -- सूक्ष्म और अशरीरी।

उनसे तेरा पहला और धुंधला परिचय शुरू होगया है।

यह शुभ है और मैं प्रसन्न हूँ।

रजनीश के प्रणाम

१५/१२/१९७०

Letter-Dec-15-1970-Samadhi.jpg


See also
Antarveena ~ 046 - The event of this letter.