Letter written on 18 Jan 1961 xm

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This is one of hundreds of letters Osho wrote to Ma Anandmayee, then known as Madan Kunwar Parakh. It was written around midnight on 18th January 1961 on his personal letterhead stationery of the day: The top left corner reads: Rajneesh / Darshan Vibhag (Philosophy Dept) / Mahakoshal Mahavidhalaya (Mahakoshal University). The top right reads: Nivas (Home) / Yogesh Bhavan, Napiertown / Jabalpur (M.P.). Many of his letters on this letterhead have had the number 115 added in by hand before "Yogesh Bhavan" to complete his address, but not this one.

Of the various hand-written numbers or marks that have been found in earlier letters, this has only a vertical line of pale blue marks in the top right corner, whose significance is not yet understood. Osho uses his usual salutation, "प्रिय मां", Priya Maan, Dear Mom.

The date has been put up top, with "adhratri" (midnight) written above.

This letter has been published, in Bhavna Ke Bhojpatron Par Osho (भावना के भोजपत्रों पर ओशो) on p 75 (2002 Diamond edition).

Letters to Anandmayee 803.jpg

रजनीश                   निवास:
दर्शन विभाग               योगेश भवन, नेपियर टाउन
महाकोशल महाविद्यालय         जबलपुर (म. प्र.)

अर्धरात्रि:
१८ जन. १९६१

प्रिय मां,
सोम..... मंगल..... बुध..... और अब तो बुध भी जा चुका। बाट है और पत्र का पता नहीं है। किस काम में लगी हैं? क्या पत्र की प्रतीक्षा का आनंद देने का आपका भी मन हुआ है! पर नहीं। जानता हूँ यह आप न कर सकेंगी। जरूर कोई उलझन है इससे चिंतित हूँ।
एकांत रात्रि। बहुत से चित्र उभरते हैं।

......

वर्धा में सद्यस्नाता आप द्वार पर आखड़ी हुई हैं। वह चित्र भूलता ही नहीं। बहुत सजीव होकर मन में बैठ गया है। बार बार लौट आता है। तीन दिन साथ था पर इस चित्र का जोड़ नहीं है। बहुत सरल – बहुत पवित्र – बहुत पारदर्शी। उसमें आप मुझे पूरी पूरी दिख आईं थीं।
आज फिर वैसे ही द्वार पर आखड़ी हुई हैं।
मधुर मुस्कुराहट फैलती जाती है और मुझे घेर लेती है।

.....

फिर सोचता हूँ – पत्र न सही : आप तो हैं!

मैं प्रसन्न हूँ : शांत और स्वस्थ। प्रभु की अनंत अनुकम्पा है और मेरी कृतज्ञता का भी पार नहीं है। कृतज्ञता का यह बोध ही जीवन के कांटों-भरे रास्तों को फूलों से भर देता है।
मेरा रास्ता फूलों और गीतों से भर गया है।

आशीर्वाद की प्रतीक्षा में
आपका ही
रजनीश


See also
Bhavna Ke Bhojpatron ~ 016 - The event of this letter.
Letters to Anandmayee - Overview page of these letters.