Letter written on 19 Nov 1969

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Osho wrote many letters in Hindi to Ma Kusum Bharti and her husband Kapil, then of Ludhiana. Most were addressed to Kusum, but always mentioning Kapil too. 27 were published in Prem Ke Swar (प्रेम के स्वर). Sannyas Wiki has images of all but one of those published in PKS, plus three unpublished ones, plus one in English published in The Gateless Gate.

This letter is dated 19th November 1969 and was published in Prem Ke Swar (प्रेम के स्वर) as letter #10. The letterhead is a typical one of those days, showing a simple all-lower-case "acharya rajneesh" at "kamala nehru nagar" in "jabalapur (m. p.)", with his 4-digit phone number and a two-colour Jeevan Jagriti Kendra logo. The second page of this letter is a PS on the back side, in which Osho talks about his upcoming schedule, among other things. This PS was apparently not included in PKS.

Prem Ke Swar 10A.jpg
Prem Ke Swar 10B.jpg

acharya rajneesh

kamala nehru nagar : jabalpur (m.p.). phone : 2957

प्यारी कुसुम,
प्रेम। मैं प्रवास से लौटा हूँ तो तेरे पत्र मिले हैं।

भूमि में पड़ा बीज जैसे वर्षा की प्रतीक्षा करता है, ऐसे ही तू प्रभु की प्रतीक्षा करती है।

प्रार्थना और प्रतीक्षा पूर्ण समर्पण ही उसका व्दार भी है।

स्वयं को पूर्णतया छोड़दे -- ऐसे जैसे कि कोई नाव नदी में बहती है।

पतवार नहीं चलाना है, बस नाव को छोड़ देना है।

तैरना नहीं है -- बस बहना है।

फिर तो नदी स्वयं ही सागर तक पहुंचा देती है।

सागर तो अति निकट है,लेकिन उन्हीं के लिए जो कि तैरते नहीं, बहते हैं।

और डूबने का भय मत रखना क्योंकि फिर उसीसे तैरने का जन्म होजाता है।

सच तो यह है कि प्रभु में जो डूबता है, वह सदा के लिए उबर जाता है।

और कहीं पहुँचने की आकांक्षा भी मत रखना।

क्योंकि जो कही पहुंचना चाहता है, वह तैरने लगता है।

सदा ध्यान रखना कि जहां पहुंच गये वही मंजिल है।

इसलिए जो प्रभु को मंजिल बनाते हैं,वे भटक जाते हैं।

सब मंजिलों से मुक्त होते ही चेतना जहां पहुंच जाती है, वही परमात्मा है।

कपिल को प्रेम। असंग को आशीष।

रजनीश के प्रणाम

१९/११/१९६९


पुनश्चः

अफ्रीका जाने की बात जुलाई के लिए टल गई है।

और पंजाब मैं जनवरी के अंत में आरहा हूँ। (अमृतसरः २९, ३०, ३१ जनवरी)

इसलिए तुम दोनों यदि दिसम्बर में जूनागढ़ आजाओ तो अच्छा है।

जूनागढ़ शिविर ९, १०, ११, १२ दिसम्बर आयोजित हो रहा है।

वहां ठहरने की व्यवस्था मेरे साथ ही कर लूंगा।

शेष शुभ।

जूनागढ़ जाने के लिए ८ दिसम्बर बम्बई आजाओ। ९ दिसम्बर के पहले प्लेन से जूनागढ़ चलेंगे।मैं भी ८ दिसम्बर की दोपहर बम्बई पहुँच जाऊँगा।

जैसा भी संभव हो मुझे सूचित करदेना।

Partial translation
"Dear Kusum, Love! As I have returned from a tour, your letters are received..."
P.S.: The matter of going to Africa for July is postponed.
And I am coming to Punjab in the end of January. (Amritsar: 29, 30, 31 January)
Hence, if in December both of you come to Junagadh then it would be fine.
Junagadh camp is being organized on 9, 10, 11, 12 December.
I would make staying arrangement with me, there.
Rest OK.
Come to Bombay on 8th December to go to Junagadh. We will go to Junagadh by 1st plane of 9th December. I will also reach Bombay in the afternoon of 8th December.
As it is possible, do inform me."


See also
Prem Ke Swar ~ 10 - The event of this letter.
Letters to Kusum and Kapil - Overview page of these letters.