Letter written on 1 Feb 1962 pm

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This is one of hundreds of letters Osho wrote to Ma Anandmayee, then known as Madan Kunwar Parakh. It was written on 1 Feb 1962 in the evening.

This letter has been published, in Bhavna Ke Bhojpatron Par Osho (भावना के भोजपत्रों पर ओशो) on p 94 (2002 Diamond edition). PS is missing in the book.

The PS reads: "Have received the letter - Buldhana got refreshed. Started taking 'Amrit Jal' - hoping that results would be good." Osho wrote in Letter written on 21 Dec 1961 om : he could have finished the program of Buldhana proposed by Shree Bhikhamchand Ji Deshalhara then only, but for his health that got upset. Hence he agreed for the program on 20-21 January (1962). So this letter confirms his visit to Buldhana and informs Ma that he has started taking the 'Amrit Jal' in response to her letter - probably the 1st in 1962.


Letters to Anandmayee 966.jpg

आचार्य रजनीश
दर्शन विभाग
महाकोशल महाविद्यालय

निवास,
११५, नेपियर टाउन,
जबलपुर (मध्यप्रदेश)

रात्रि: १ फरवरी १९६२

प्रिय मां,
एक शव यात्रा से लौटा हूँ। कल सांझ ही उनसे कहकर आया था चिंता न करें। कहते हैं चिंता ही चिता बन जाती है। और चौबीस घंटे बाद ही उनकी चिता से लौटा हूँ! ऐसा आभास मुझे कल ही हुआ था। शरीर उनका रुग्ण था पर मन उससे भी ज्यादा था। शायद मन की रुग्णता भी शरीर से ही निकली थी। प्रत्येक व्यक्ति कितना व्यर्थ का मानसिक भार ढोता है। यह भार और तनाव ही तोड़ देता है। जिस जीवन से शांति और आनंद मिल सकता था : उससे केवल कांटे ही मिल पाते हैं।

फूल बहुत हैं : शायद फूल ही फूल हैं : पर हमें कांटों की ही आदत पड़ी है। जीवन का आनंद और प्रकाश दीखता ही नहीं है। सागर की बीच ही हम प्यासे रह जाते हैं।

कबीर ने कहा है : “यह सुन बहुत हंसी आती है कि मछली सागर में ही प्यासी है।“ आज उस चिता के किनारे खड़े खड़े मुझे कबीर की हंसी सुनाई पड़ने लगी थी। मेरा मन भी हुआ कि हंसूँ : खूब हंसूँ : जो व्यक्ति चला गया वह जीवन भर व्यर्थ की अशांति में घिरा था : काल्पनिक उसका दुख था। यूं तो सभी दुख काल्पनिक है। दुख है क्योंकि हम अपने में नहीं हैं। अपने में न होना स्वप्न में होना है। स्वप्न में हैं इससे दुख है। स्वन छोड़ें तो आनंद ही आनंद शेष रह जाताहै।

रजनीश के प्रणाम

(पुनश्च: पत्र मिल गया है। बुलढ़ाणा ताजा होआया। अमृत जल लेना शुरू किया हूँ : परिणाम ठीक होंगे ऐसी आशा करता हूँ।)

Partial translation
"I have returned from a death procession."
...
PS: Have received the letter - Buldhana got refreshed. I have started taking 'Amrit Jal' - hoping that results would be good."
See also
Bhavna Ke Bhojpatron ~ 031 - The event of this letter.
Letters to Anandmayee - Overview page of these letters.