Letter written on 21 Aug 1961 am

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This is one of hundreds of letters Osho wrote to Ma Anandmayee, then known as Madan Kunwar Parakh. It was written in the morning of 21st August 1961. The letterhead has a simple "रजनीश" (Rajneesh) in the top left area, in a heavy but florid font, and "115, Napier Town, Jabalpur (M.P.) in the top right, in a lighter but still somewhat florid font.

Osho's salutation in this letter is "प्रिय मां", Priya Maan, Dear Mom. It has a few of the hand-written marks that have been observed in other letters: a blue number (17) in a circle in the top right corner, a red tick mark and a pale blue mirror-image "42" at the top in the middle.

Osho informs that he had been to 'Seoni' (some 150 km from Jabalpur) to speak on 'Tulsi Smruti Divas' - that's why delay in writing the letter.

Letters to Anandmayee 840.jpg

रजनीश
११५, नेपियर टाउन
जबलपुर (म. प्र.)

प्रभात:
२१ अग. ‘६१

प्रिय मां,
सुबह धुंधलके से घिरी है। एक सुनसान रास्ते पर अपने ही पदचापों को सुनकर लौटा हूँ। रोज वही रास्ते पर सब कितना नया होजातां है। प्रकृति में कुछ भी दुहराता नहीं है। प्रकृति का चितेरा रोज नये चित्र बनाता है।

रात्रि सोया तब आपका स्मरण था। सुबह उठा हूँ तब भी वह गया नहीं है। रात्रि भर मेरे साथ रही हैं! इस अर्थ में मार्ग पर अकेला नहीं था!

प्रेम न हो तो सब अकेले हैं।

प्रेम जोड़ देता है। प्रेम योग है। इसलिए प्रेम प्रभु भी है।

xxx

मैं बाहर था इसलिए यह पत्र देर से लिख रहा हूँ। तुलसी-स्मृति दिवस पर बोलने सिवनी गया था। नियत दिन पर आप पत्र की बाट देखेंगी – कैसे देखेंगी! – यह मैं देख पा रहा हूँ।

सबको मेरे प्रणाम। शारदा, तारा और बच्चों को स्नेह।

रजनीश
के
प्रणाम


See also
Letters to Anandmayee ~ 14 - The event of this letter.
Letters to Anandmayee - Overview page of these letters.