Letter written on 22 Nov 1960

From The Sannyas Wiki
Jump to: navigation, search

This is one of hundreds of letters Osho wrote to Ma Anandmayee, then known as Madan Kunwar Parakh. It was written on 22nd November 1960 on his letterhead stationery of the day: The top left corner reads: Rajneesh / Darshan Vibhag (Philosophy Dept) / Mahakoshal Mahavidhalaya (Mahakoshal University). The top right reads: Nivas (Home) / 115, Yogesh Bhavan, Napiertown / Jabalpur (M.P.)

In between these two letterhead items is a handwritten "No. 1".

Osho addresses her with "प्रिय मां", Priya Maan, Dear Mom.

This letter has been published, in Bhavna Ke Bhojpatron Par Osho (भावना के भोजपत्रों पर ओशो) on p 60 (2002 Diamond edition).

Letters to Anandmayee 786.jpg

रजनीश                   निवास:
दर्शन विभाग               ११५, योगेश भवन, नेपियर टाउन
महाकोशल महाविद्यालय         जबलपुर (म. प्र.)

प्रिय मां,
पद-स्पर्श। आपका आशीष पत्र मिला। मैं कितना आनंदित हूँ कैसे कहूँ? मां जैसी अमूल्य वस्तु निर्मूल्‍य मिल जावे – और वह भी मुझ जैसे अपात्र को तो इसे प्रभु की अनुकंपा के अतिरिक्त और क्या कहूँ? उस अचिन्त्य और अज्ञेय के स्नेह-प्रसाद की अनुभूति जैसे जैसे मुझ पर प्रगट होती जा रही है वैसे वैसे मेरा जीवन आनंद, शांति और कृतज्ञता के अमृत-बोध से भरता जाता है। आपको पाने में भी उसका करुणा-मय हाथ ही पीछे है यह मैं स्पष्ट देख पारहा हूँ।

***

आपको देखा उसी क्षण जो आपने पत्र में लिखा है वह मुझे दीख आया था। पत्र ने इसलिए मुझे अचंभित नहीं किया, बल्कि लगा कि मैं तो जैसे उसकी बाट ही देख रहा था! आपकी आंखों में मातृत्व का यह स्नेह मुझे अनदीखा नहीं रहा था। किसी अतीत जीवन में आप मेरी मां थी ऐसी आपकी प्रतीत है तो निश्चय ही आप मेरी मां रहीं होंगी। मेरी तो कामना है कि नारी मात्र को मैं अपनी मां के रूप में देख पाउँ। इसी मार्ग पर चल रहा हूँ और आपका स्नेह और आशीष मेरे पदों को सबल करेगा ऐसी आशा है।

***

मैं स्वस्थ और प्रसन्न हूँ। किसी छुट्टी में आने का प्रयास करूँगा। अब तो आना ही पड़ेगा। जिस स्नेह में बांध लिया है उसका आमंत्रण तो कभी अस्वीकृत नहीं होता है।
पत्र दें और मेरे योग्य सेवा लिखें। मेरे लिए प्रभु से सदा प्रार्थना करती रहें। सबको मेरे विनम्र प्रणाम। बच्चों को मेरा बहुत-बहुत स्नेह।

रजनीश के प्रणाम
२२ नव. १९६०


See also
Bhavna Ke Bhojpatron ~ 004 - The event of this letter.
Letters to Anandmayee - Overview page of these letters.