Letter written on 22 Nov 1961 am

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This is one of hundreds of letters Osho wrote to Ma Anandmayee, then known as Madan Kunwar Parakh. It was written on 22nd November 1961 in the morning. The letterhead has a simple "रजनीश" (Rajneesh) in the top left area, in a heavy but florid font, and "115, Napier Town, Jabalpur (M.P.)" in the top right, in a lighter but still somewhat florid font.

Osho's salutation in this letter is "प्रिय मां" (Priya Maan, Dear Mom). It has a couple of the hand-written marks that have been observed in other letters: a blue number (36) in a circle in the top right corner and a second, pale and mirror-image number (62) in the bottom right corner, but no red tick mark.

It has been published in Krantibeej (क्रांतिबीज), as letter #53: edited and trimmed text. Last 2,5 paragraphs from the book are not from this letter and it seems they inserted from sowhere else.

Letters to Anandmayee 865.jpg

रजनीश
११५, नेपियर टाउन
जबलपुर (म. प्र.)

प्रभात:
२२ नव. १९६१

प्रिय मां,
भोर का आखिरी तारा डूब रहा है। कुहासे में ढंकी सुबह का जन्म होने को है। पूरब पर प्रसव की लाली फैल रही है।

एक मित्र ने एक प्रियजन की मृत्यु की खबर दी है। रात्रि ही देह से उनका संबंध टूटा है। फिर थोड़ी देर चुप्पी के बाद वे मृत्यु पर बात करने लगे हैं। उन्होंने पूछा है : “रोज मृत्यु होती है फिर भी प्रत्येक ऐसे जीता जाता है कि जैसे उसे नहीं मरना है। यह समझ में ही नहीं आता है कि मैं भी मर सकता हूँ। इतनी मृत्यु के बीच यह अमृत्व का विश्वास क्यों है?”

यह विश्वास बहुत अर्थपूर्ण है। यह विश्वास बताता है कि जो देह में जो बैठा है वह मर्त्य नहीं है। वह जो देख रहा है – देह का दृष्टा – वह जानता है कि मैं देह से पृथक्‌ हूँ। मैं मृत्यु नहीं हूँ। वह जान रहा हैः ‘मेरी मृत्यु नहीं है। मृत्यु केवल देह परिवर्तन है। मैं नित्य हूँ : सब मृत्युओं को पार करके भी मैं अमृत शेष रह जाता हूँ। पर यह बोध अचेतन है : इसे चेतन बना लेना ही मुक्त होजाना है।

प्रत्येक के भीतर ही मोक्ष है; उसे केवल जानना भर है।

रजनीश के प्रणाम

(पुनश्च:
सर्दी जोर की होआई है : अरविन्द का कोट पारसल से ही पहूँचा दें। एक बात और साथ ही मेरे चादर वाले चित्र का निगेटिव भी रखदें। तीनों चित्रों में वही सब को पसंद आया है।)


See also
Krantibeej ~ 053 - The event of this letter.
Letters to Anandmayee - Overview page of these letters.