Letter written on 25 Oct 1965

From The Sannyas Wiki
Jump to: navigation, search

Letter written to Ma Yoga Sohan on 25 Oct 1965 in Gadarwara. It has been published in Prem Ke Phool (प्रेम के फूल) as letter #120.

Sohan img697.jpg

Acharya Rajnish

Jeevan Jagruti Kendra, 115, Napier Town, Jabalpur (M.P.)

गाडरवारा

प्यारी सोहन,
प्रेम। कल रात्रि जब सारे नगर में दिये ही दिये जले हुए थे तो मैं सोच रहा था कि मेरी सोहन ने भी दिये जलाये होंगे -- और उन दीयों में से कुछ तो निश्चय ही मेरे लिए ही होंगे ! और फिर वे दिये मुझे दिखाई देने लगे जो कि तूने जलाये थे और वे दिये भी जो कि सदा ही तेरा प्रेम जलाये हुए है।

मैं कल और यहां रुकूंगा । सबसे तेरी बातें कहीं हैं और सभी तुझे देखने को उत्सुक होगये हैं।

माणिक बाबू को प्रेम। बच्चों को आशीष ।

रजनीश के प्रणाम

२५/१०/१९६५

Partial translation
"I will stay here (Gadarwara) still for tomorrow."
See also
Prem Ke Phool ~ 120 - The event of this letter.
Letters to Sohan and Manik - Overview page of these letters.