Letter written on 26 Nov 1970

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Osho wrote many letters in Hindi to Ma Kusum Bharti and her husband Kapil, then of Ludhiana. Most were addressed to Kusum, but always mentioning Kapil too. 27 were published in Prem Ke Swar (प्रेम के स्वर). Sannyas Wiki has images of all but one of those published in PKS, plus three unpublished ones, plus one in English published in The Gateless Gate.

This letter is dated 26th November 1970 and was published in Prem Ke Swar (प्रेम के स्वर) as letter #22. The letterhead appears to be a typical one from the short-lived Churchgate period, with the addition of a second, hand-written phone number, which, as the number at Osho's next place, Woodland, may be a useful indicator of when exactly he moved.

Prem Ke Swar 22.jpg

acharya rajneesh

27, C. C. I. CHAMBERS CHURCHGATE BOMBAY-20 PHONE NO. : 293782 382184

प्यारी कुसुम,
प्रेम।

सत्य क्या है ?

परिभाषा में जो आजाता है, कम से कम वह नहीं है।

इसलिए परिभाषायें छोड़ो।

व्याख्यायें छोड़ो।

व्याख्यायें मन के खेल हैं।

व्याख्यायें विचार का सृजन है।

और जो है, वह मन के पार है।

उसे विचार स्पर्श भी नहीं कर पाते हैं।

जैसे लहरें झील की शांति से सदा अपरिचित रहतीहैं; ऐसे ही विचार भी अस्तित्व से कभी परिचित नहीं होपाते हैं; क्योंकि जब लहरें होती हैं, तब उसके ही कारण झील शांत नहीं होती है और जब झील शांत होती है, तब उसकी शांति के कारण ही लहरें नहीं होती है।

फिर, जो है,उसे जानना है।

उसकी व्याख्या उसे जानने से बहुत भिन्न बात है।

लेकिन, व्याख्या धोखा देसकती है।

खेतों में जैसे धोखे के आदमी खड़े रहते हैं, असली आदमियों के वस्त्र पहनकर ऐसे है शब्द सत्यों के धोखे बन जाते हैं।

सत्य के खोजी को शब्दों से सावधान होने की जरूरत है।

शब्द सत्य नहीं हैं।

सत्य शब्द नहीं है।

सत्य है अनुभूति।

सत्य है अस्तित्व।

और जो उसतक पहुँचने का मार्ग है : नेति,नेति। (न यह न वह। )

व्याख्याओं को काटो।

परिभाषाओं को काटो।

शास्त्रों को काटो।

सिद्धांतों को काटो।

कहो : नेति,नेति। (Not This Not That )

फिर स्व-पर को काटो।

कहो : नेति,नेति।

और तब -- निपट शून्य में जो प्रगट होता है ,वही सत्य है।

क्योंकि, बस वही है और शेष सब स्वप्न है।

रजनीश के प्रणाम

२६/११/१९७०


पुनश्चः कपिल को प्रेम।

असंग को आशीष


See also
Prem Ke Swar ~ 22 - The event of this letter.
Letters to Kusum and Kapil - Overview page of these letters.