Letter written on 29 Dec 1970 (Siddhi)

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Letterhead reads:

acharya rajneesh on top in lower-case
A-1 WOODLAND PEDDAR ROAD BOMBAY-26 PHONE : 382184 in ALL-CAPS

Logo in the upper right corner is a "standard" Jeevan Jagriti Kendra logo in two colours.

The letter is dated 29th December 1970, recipient is Ma Yoga Siddhi (see also her husband's page). It appears to have been published as Letter #94 of Antarveena (अंतर्वीणा)

acharya rajneesh

A-1 WOODLAND PEDDAR ROAD BOMBAY-26. PHONE 382184

प्रिय योग सिद्धि,
प्रेम। एक बार स्वयं को परमात्मा के हाथ में छोड़ते ही कुछ भी करने को शेष नहीं रह जाता है।

फिर तो सब जैसे स्वयं ही होने लगता है।

आनंदित हो कि तेरे जीवन में अब उसीका प्रारंभ है।

तैरना पूरा और बहना शुरू हुआ है।

मैं इसी भाव-दशा को सन्यास कहता हूँ।

सरिता स्वयं ही सागर में लिये जाती है -- फिर तैरना किसलिए ?

प्रयत्न किसलिए -- प्रयास किसलिए ?

अप्रयास (Effortlessness) में ही प्रसाद (Grace) है।

लेकिन इसका अर्थ निष्क्रियता नहीं है।

बहना भी सक्रियता है।

लेकिन उसमें कर्ता की अनुपस्थिति है।

कर्म है और कर्ता नहीं है तो अकर्म है।

और कर्म नहीं है और कर्ता है तो भी अकर्म नहीं है।

प्रभु-समर्पित कर्म अकर्म है।

रजनीश के प्रणाम

२९/१२/१९७०

Letter-29-Dec-1970.jpg


See also
Antarveena ~ 094 - The event of this letter.