Letter written on 29 Jun 1962

From The Sannyas Wiki
Jump to: navigation, search

This is one of hundreds of letters Osho wrote to Ma Anandmayee, then known as Madan Kunwar Parakh. It was written on 29 June 1962.

This letter has been published in Krantibeej (क्रांतिबीज) as letter 97 (edited and trimmed text) and later in Bhavna Ke Bhojpatron Par Osho (भावना के भोजपत्रों पर ओशो) on p 142 (2002 Diamond edition). Although the book states the date 27th of June.

In PS Osho writes: "Received the letter. Became worried that your health is not good. I have become OK due to your best wishes. Now let me see whether my well-wishes makes you fine, faster or not? I am happy to know that you are coming. Inform about the train and day from Bhopal. Perhaps but, this letter might not be received before starting for Bhopal."

Letters to Anandmayee 1010.jpg

रजनीश

११५, नेपियर टाउन
जबलपुर (म.प्र.)

२९ जून १९६२

प्रिय मां,
आकाश आज तारों से नहीं भरा है। काली बदलियां घिरी हैं और रह रह कर बूंदे पड़ रही हैं।

रातरानी के फूल खिल गये हैं और हवायें सुवासित होगई हैं।

मैं हूँ ऐसा कि जैसे नहीं ही हूँ और न होकर होना पूर्ण होगया है। एक जगत्‌ है जहां मृत्यु जीवन है और जहां खोजाना पाजाना है। एक दिन सोचता था बूंद को सागर में गिरा देना है : अब पाता हूँ कि यह तो सागर ही बूंद में गिर आया है!

मनुष्य का होना ही उसका बंधन है। उसका शून्य होना मुक्ति है। यह होने की गांठ व्यर्थ ही भटकाती है और शून्य होने का भय पूर्ण होने से रोकता है। जबतक न कुछ होने की तैयारी नहीं है, तबतक मनुष्य न कुछ ही बना रहता है। मृत्यु में उतरने की जबतक आकांक्षा नहीं है, तब तक मृत्यु में ही भटकना होता है। जो मृत्यु लेने को तैयार होजाता है : वह पाता है कि मृत्यु है ही नहीं और अमृत उसमें अवतरित होआता है।

ऐसा विरोध का नियम जीवन का नियम है। इस नियम को जानना योग है और ठीक से जान लेना उसके बाहर होजाना है। विरोध के इस नियम का ज्ञात न होना ही भटकाता है : ज्ञात हो जाने से भटकन समाप्त होजाती है और वह उपलब्ध होता है जो कि यात्रा का पड़ाव नहीं, यात्रा का अंत है।

रजनीश के प्रणाम


पुनश्च: पत्र मिला है। चिंता हुई कि स्वास्थ्य आपका ठीक नहीं है। मैं तो आपकी शुभकामनाओं से ठीक होगया हूँ अब देखूँ मेरी शुभकामनायें आपको जल्दी ठीक करती हैं या नहीं? आ रही हैं यह जानकर आनंदित हूँ। भोपाल से ट्रेन और दिन सूचित करदें। पर शायद यह पत्र भोपाल के पूर्व मिलने को नहीं है।


See also
Krantibeej ~ 097 - The event of this letter.
Letters to Anandmayee - Overview page of these letters.