Letter written on 29 Nov 1961 am

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Letter written to Shrikrishna Agarwal, Osho’s childhood friend. Osho lovingly called him Shree. It is unknown if it was published.

Letters to on 29 Nov 1961 am.jpg
संत तारण तरण जयंती समारोह समिति
कार्यालय :
११५, नेपियर टाउन,
जबलपुर (मध्य प्रदेश)


प्रभात:
२९ नव. १९६१
प्रिय श्री,
स्नेह। पत्र पाकर आनंदित हुआ हूँ। जीवन में सार्थकता पाने की कामना शुभ है। विचार की शक्ति महान है : हम जो सोचते हैं, धीरे धीरे वही होजाते हैं। श्रेष्ठ विचारों को मन में जगह दो और फिर एक दिन तुम पाओगे कि उनमें अंकुर निकल आते हैं। विचार बीज हैं। बीज से जैसे पौधा आता है वैसे ही विचार से आचार आजाता है।
ईश्वर को ध्यान में रखो और आत्म हीनता को मन में प्रवेश न दो। वह प्रत्येक के भीतर बैठा हुआ है और किसी को भी हीन होने का कोई कारण नहीं है। शक्ति और सामर्थ्य का विचार करो, आनंद और शांति का विचार करो, स्वास्थ्य और स्वतंत्रता का विचार करो। प्रत्येक सांस में इन अमृत-विचारों को घुल जाने दो और फिर तुम पाओगे कि एक नया जीवन उपलब्ध हो रहा है।
शांति, स्वास्थ्य और आनंद प्रत्येक का स्वरूप-सिद्ध अधिकार है। सुबह घूमना शुरू किया है, यह अच्छा है। सांसों के साथ स्वास्थ्य आरहा है ऐसी भावना भी करना। इसमें कँजूसी करने की जरूरत नहीं है। पूरे मन से, पूरे संकल्प को कहने दो कि तुम स्वस्थ होरहे हो : इस भाव को समग्र तन-मन में गूंजने दो और फिर जो जादू सा परिवर्तन होगा उसकी कल्पना भी तुम अभी नहीं कर सकते हो। आधुनिक चिकित्सा-शास्त्र ने यह स्वीकार कर लिया है कि स्वास्थ्य और अस्वास्थ्य शरीर की कम, मन की ही ज्यादा बात है।
प्रभु से तुम्हारे स्वास्थ्य और आनंद की कामना करता हूँ। सबको मेरे विनम्र पणाम कहना।
रजनीश के प्रणाम
Translation
Morning:
29 Nov. 1961
Dear Shree,
Love. I am pleased to have received (your) letter. It's good to have desire for meaningfulness in the life. The power of thinking is great : whatever we think, slowly and slowly we become that. Give place to the best thoughts in the mind and then you will find that sprouts come out in them. Thoughts are the seeds. As the plant comes from seeds - behaviour comes out of the thoughts.
Keep the God in your thought and don't give entry to the self inferiority into your mind. He is sitting (present) in everybody and there is no reason for anyone to be inferior. Think of the power and potential, think of happiness and peace, think of health and freedom. Let these amrit-thoughts be dissolved in the every breath then you will find that new life is around you.
Peace, health and happiness is the right of everyone bestowed by very nature. It's good that you have started walking in the morning. Conceive that the health is also coming with breaths. There is no need for miserliness in this. With the whole mind, let the complete resolve say that you are becoming healthy : let this emotion reverberate in the whole body-mind then such a magical transformation would happen - that you can not even imagine now. The modern medical science has accepted that health and il-health (disease) are lesser matter of facts about body and more of the mind.
I am praying God for your health and happiness. Convey my humble pranam to all.
Rajneesh Ke Pranam


See also
Letters to Shrikrishna Agarwal ~ 01 - The event of this letter.