Letter written on 2 Dec 1961

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This is one of hundreds of letters Osho wrote to Ma Anandmayee, then known as Madan Kunwar Parakh. It was written on 2nd December 1961. The letterhead has a simple "रजनीश" (Rajneesh) in the top left area, in a heavy but florid font, and "115, Napier Town, Jabalpur (M.P.) in the top right, in a lighter but still somewhat florid font.

Osho's salutation in this letter is "प्यारी मां", Pyari Maan, replacing the normal "प्रिय मां", Priya Maan, both meaning Dear Mom, Beloved Mother. It has a couple of the hand-written marks that have been observed in other letters: a blue number (39) in a circle in the top right corner and a second, pale and mirror-image number (64) in the bottom right corner, but no red tick mark.

This letter has been published in Bhavna Ke Bhojpatron Par Osho (भावना के भोजपत्रों पर ओशो), p 49 (2002 Diamond edition), except PS.

Letters to Anandmayee 867.jpg

रजनीश
११५, नेपियर टाउन
जबलपुर (म. प्र.)

२ दिस. १९६१

प्यारी मां,
प्रणाम। कल रात्रि भर आपका स्मरण रहा है : एक लम्बे स्वप्न में साथ रही हैं। यह सह-यात्रा बहुत सुखद रही है और जाग आने पर भी उसके चित्र आंखों में तैर रहे हैं। इस स्वप्न में कुछ ताने-बाने तो पचमढ़ी और ताड़ोबा के दीखते थे पर कुछ एकदम अभिनव थे। एक बहुत सुन्दर पहाड़ी-घाटी में कमल से ढ़ंकी झील पर बर्षों रहना हुआ है। जो बजरा निवास बना था वह तो अब भी दीख रहा है!

स्वप्न को लिए थोड़ी देर ही तक बिस्तर पड़ा रहा हूँ : फिर मुरगे जोर जोर से बांग देने लगते हैं और बाहर आना पड़ा है। रत्रि अभी टूटी नहीं है और चांदनी वृक्षों से लिपटी सोई है।

स्वप्न के संबंध में अनजाने विचार चल ही रहा है। एक बहुत अद्भुत बात सदा स्वप्नों में दिखाई देती है। मैं सदा गैरिक वस्त्रों में दिखाई पड़ता हूँ : भिक्षा पात्र भी भूलता नहीं है। जन्म-जन्मों में जैसे वही भाग्य रहा है। इस स्वप्न में भी उस बजरे पर सारे वैभव की व्यवस्था थी पर मैं भिक्षु ही था। बजरा और वैभव सब आपका था : मैं तो बस अतिथि था।

कौन जाने यह सब कभी हुआ ही हो? जन्म तो बीत जाते हैं; स्मृतियां नहीं बीतती हैं। सब मिट जाता है : संस्कार रह जाते हैं।

घंटा घर ने पांच बजा दिये हैं। चलूँ – घूम आउँ!

सब को विनम्र प्रणाम।

रजनीश के प्रणाम

(पुनश्च: पारसल आ गई है: लेकिन निगेटिव क्यों नहीं भेजा है? उसे भेजदें : बहुत से लोग चित्र मांगते हैं।)



See also
Bhavna Ke Bhojpatron ~ 002 - The event of this letter.
Letters to Anandmayee - Overview page of these letters.