Letter written on 2 Sep 1961 pm

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This is one of hundreds of letters Osho wrote to Ma Anandmayee, then known as Madan Kunwar Parakh. It was written in the evening of 2nd September 1961.

The letterhead has a simple "रजनीश" (Rajneesh) in the top left area, in a heavy but florid font, and "115, Napier Town, Jabalpur (M.P.) in the top right, in a lighter but still somewhat florid font.

Osho's salutation in this letter is "प्रिय मां", Priya Maan, Dear Mom. It has a few of the hand-written marks that have been observed in other letters: a blue number (19) in a circle in the top right corner and a red tick mark. It also has the new variation on a previous theme first noted in Letter written on 5 Sep 1961 pm: a black non-mirrored "44", 44 fitting nicely with other recent numbers. AND, rather than replacing the former style, a pale blue mirror-image number or mystery mark, it comes in addition to a "44" in that style.

Letters to Anandmayee 842.jpg

रजनीश
११५, नेपियर टाउन
जबलपुर (म. प्र.)

रात्रि:
२ सितम्बर ‘६१

मां,
रात्रि का सन्नाटा। एक घुमावदार पहाड़ी रास्ते से गाड़ी नीचे उतर रही है। अभी अभी पानी पड़ना शुरू हुआ है। बर्षा के धुंध में पहाड़ी के नीचे फैली बस्ती की बत्तियां बड़ी सुन्दर लग रही हैं।

मैं एक मिलिटरी केंद्र में बोलकर लौट रहा हूँ। मिलिटरी-गाड़ी की खुली खिडकियों से पानी की फुहार भीतर आ रही है।

मैं बाहर देख रहा हूँ और फिर देखना दोहरा हो जाता है। मैं बाहर भी देख रहा हूँ और वह भी दीख रहा है जो देख रहा है।

एक अवर्णनीय शांति भीतर पकड़ लेती है। चेतना अपने केन्द्र को पालेती है। शरीर की खिडकियों के जो बाहर आता है : उसका सम्यक स्मरण ही समाधि है। इस केन्द्र का स्मरण ही आंतरिक क्रांति ले आता है। तब हम पाते हैं कि जो पाता हैं वह सदा से उपलब्ध है। उसे एक क्षण भी खोया नहीं गया है।

कुछ भी कमी नहीं है : कोई अपूर्णता नहीं है : कोई बंधन नहीं है। चेतना नित्य मुक्त है। यह जान लेना ही मुक्त होजाना है। मोक्ष में कुछ पाया नहीं जाता है केवल “हम मुक्त हैं” यह भ्रांत दृष्टि ही खोनी पड़ती है।

हम जो है वह हो जाना ही मोक्ष है।

रजनीश के प्रणाम

पुनश्च:
आपका पत्र और शांता की राखी मिल गई है। शांता को हैदराबाद के पते से पत्र दे रहा हूं।

Partial translation
"After talking at one military centre, I am returning back. From the open windows of the military vehicle drizzle of water (rain spray) is coming inside."
See also
Letters to Anandmayee ~ 16 - The event of this letter.
Letters to Anandmayee - Overview page of these letters.