Letter written on 31 Aug 1960

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From 1957 to 1968, Osho wrote many letters to Babulal Ji Deriya, of Babai (MP), India. The wiki has images of thirteen, believed for now to be all of them. Most are written on postcards. This one was written on an Inland Letter form. See Deriya Ji's page or Osho's manuscript letters for links to all these letters.

For the Post Office, Osho used his full name as above. In addressing him personally, he wrote "Poojya Deriya Ji" or "Shraddheya Deriya Ji" (venerable, honoured), only later using the more familiar "Priya Deriya Ji" (dear, beloved), but all following his sometime custom of addressing male friends by their last names. See also Lashkariji, Punglia Ji, etc.

This letter is dated 31st August 1960 and sent from Jabalpur. An English translation was published in Sw Ageh Bharti's book Beloved Osho, and likely the Hindi original version was published previously in one of Ageh's Hindi books. It is said also to be in line to be published eventually in a larger edition of Prem Ke Swar (प्रेम के स्वर) (as letter #63), though this development appears not to be fast-tracked. In the letter, Osho mentions programs in Vidisha (MP) and Wardha (MH, Mahatma Gandhi's HQ), among others. And in a PS, he recommends a Naturopathic healing place run by Gandhi's people in Uruli Kanchan, East of Pune.

श्रद्धेय डेरिया जी,
आपका पत्र मिलाः ख़ुशी हुई। मैं २८ अग. को बम्बई से लौट आया हूँ। कार्यक्रम सुन्दर हुआ। बम्बई से पूना और उरली कांचन भी होआया हूँ। वहां पू. दद्दा आपकी राह देख रहे हैं। आप होआयें तो अच्छा हो। आश्रम बहुत व्यवस्थित और स्वास्थप्रद वातावरण में है। पू. बालकोवा जी से भी मिलना हुआ है।

यहां व्यख्यान माला चल रहीहै। लेकिन मैं पुरे दिन उपस्थित नहीं रह सका हूँ और २ सित. को पुनः विदिशा जारहा हूँ। ३ सित. को यहां पर्युषण व्याख्यान माला में भाग लेना है।

पू. चिरंजीलाल जी ने मुझसे भी वर्धा पहुँचने का बहुत आग्रह किया है और आपको भी पत्र मेरे सामने ही लिखा था। मैं भी पहुँचने की सोच रहा हूँ। ताराचंद भाई का भी आग्रह है कि मैं पहुँचू। वे बम्बई में मिले तो आपका स्मरण कर रहे थे। शेष शुभ। आप वर्धा पहुँच रहे हैं तब वहां मिलना होसकेगा। सबको मेरा प्रणाम कहें।

रजनीश के प्रणाम

३१ अग.१९६०

Deriya-letter-31Aug1960-letter.jpg

पुनश्चः
उरली कांचन सत्याग्रह के लिए बहुत उपयोगी होसकता है। जायें तो उसे भी लेजायें। गाडरवारा से ठीक उस जैसी ही परेशानी से पीडित एक युवक को उरली की निसर्ग-चिकित्सा से आश्चर्य जनक लाभ पहुँचा है। आप न भी जावें तो भी सत्याग्रह को पहुंचा दे सकते हैं : दद्दा उसकी व्यवस्था कर लेंगे।

रजनीश


To --
श्री बाबुलाल जी डेरिया,
बाबई (म.प्र.)
(जिलाः होशंगाबाद (म.प्र.))

भेजने वाले का नाम और पता :-
रजनीश,
११५ नेपियर टाउन, जबलपुर (म.प्र.)

Deriya-letter-31Aug1960-address.jpg
Partial translation
"Revered Deriya Ji,
Your letter is received – so pleased. I have returned back from Bombay on 28th August. The program was nice. I had been to Poona and Uruli Kanchan from Bombay.
...
Here ‘Vyakhayan Mala’ is going on. But I can not be present for the whole day and on 2nd September I am going to Vidisha again. I have to participate in ‘Paryushan Vyakhayan Mala’ there on 3rd September..."
See also
Letters to Deriya Ji ~ 08 - The event of this letter.