Letter written on 3 Nov 1969

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Osho wrote many letters in Hindi to Ma Kusum Bharti and her husband Kapil, then of Ludhiana. Most were addressed to Kusum, but always mentioning Kapil too. 27 were published in Prem Ke Swar (प्रेम के स्वर). Sannyas Wiki has images of all but one of those published in PKS, plus three unpublished ones, plus one in English published in The Gateless Gate.

This letter is dated 3rd November 1969 and was published in Prem Ke Swar (प्रेम के स्वर) as letter #9. The letterhead is a typical one of those days, showing a simple all-lower-case "acharya rajneesh" at "kamala nehru nagar" in "jabalapur (m. p.)", with his 4-digit phone number and a two-colour Jeevan Jagriti Kendra logo.


कपिल को प्रेम। असंग को आशीष।

रजनीश के प्रणाम

३/११/१९६९

acharya rajneesh

kamala nehru nagar : jabalpur (m.p.). phone : 2957

प्यारी कुसुम,
प्रेम। तेरे ह्रदय की भांति ही सरल और कुआंरा पत्र पाकर अति आनंदित हूँ।

वह तू लिखना चाहती है जो कि लिखा ही नहीं जासकता है इसलिए अनलिखा पत्र ही भेज देती है।

यह भी ठीक ही है : क्योंकि जो न कहा जासके, उस संबंध में मौन ही उचित है।

लेकिन ध्यान रहे कि मौन भी मुखर है।

वह भी कहता है और बहुत कहता है।

शब्द जिसे नहीं कह पाते हैं, मौन उसे भी कह पाता है।

रेखायें जिसे नहीं घेर पाती हैं, शून्य उसे भी घेर लेता है।

असल में तो शून्य से अनघिरा बच ही क्या सकता है ?

मौन से अनकहा भी कुछ नहीं बचता है।

शब्द जहां व्यर्थ हैं, निशब्द वहीँ सार्थक है।

आकर की जहां सीमा है, निराकार का वहीँ प्रारंभ है।

इसलिए वेद का जहां अंत है, वेदान्त का वहीँ जन्म है।

वेद की मृत्यु वेदांत है।

शब्द से मुक्ति ही सत्य है।


कपिल को प्रेम। असंग को आशीष।

रजनीश के प्रणाम

३/११/१९६९

Prem Ke Swar 09.jpg


See also
Prem Ke Swar ~ 09 - The event of this letter.
Letters to Kusum and Kapil - Overview page of these letters.