Difference between revisions of "Letter written on 5 May 1961 xm"

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This is one of hundreds of letters Osho wrote to [[Ma Anandmayee]], then known as Madan Kunwar Parekh. It was written in the evening of 5th May 1961 on the same new letterhead as [[Letter written on 4 May 1961 am]]. It features only "रजनीश" (Rajneesh) in the top left area, in a heavy but florid font, and "115, Napier Town, Jabalpur (M.P.) in the top right, in a lighter but still somewhat florid font.
  
This is one of hundreds of letters Osho wrote to [[Ma Anandmayee]], then known as Madan Kunwar Parekh. It was written around midnight on 5th May 1961 on the same new letterhead as [[Letter written on 4 May 1961 am]]. It features only "रजनीश" (Rajneesh) in the top left area, in a heavy but florid font, and "115, Napier Town, Jabalpur (M.P.) in the top right, in a lighter but still somewhat florid font.  
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Osho's salutation in this letter is "पूज्य मां", Pujya Maan, Revered Mother, the new normal for this period. Letter has a blue number 1 a circle in the top right corner, as well as a pale blue mark in the top middle which comes out as "26" in a mirror. (See [[Talk:Letter written on 25 Apr 1961 om]] for more on what that might signify.)
  
Osho's salutation in this letter is "पूज्य मां", Pujya Maan, Revered Mother, the new normal for this period. As with the letter of 4 May, there is a blue number (2, the same) in a circle in the top right corner, as well as a pale blue mark in the top middle which comes out as "26" in a mirror. (See [[Talk:Letter written on 25 Apr 1961 om]] for more on what that might signify.)
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प्रणाम। कल दोपहर आपका पत्र मिला। यह मैं जानता हूँ कि आपके शुभाशीशों की छाया सदा मेरे उपर रहने को है। उसे मैं प्रभु की अनुकम्पा ही मानता हूँ। स्वप्न में मैं आपको मेरे लिए दुखी होते देखा हूँ इसलिए ऐसा लिखा था। यह तो निश्चित है कि दुख से हमें उपर उठना है और इसलिए उस सबसे भी उपर उठना आवश्यक है जो कि दुख का कारण बन सकता है।
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मैं शांत मन हूँ और जीवन के मधुर गीत को दिन दिन अधिक पूर्णता से सून पारहा हूँ।
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सिरपुर (खानदेश) में होरहे एक सम्मेलन के आयोजक पीछे पड़े हैं। २० मई को एक दिन के लिए वहां जाना पड़ेगा। पचमढ़ी कब चलना है यह सूचित करें। १० मई को चलती हैं तब मुझे वहीं से सिरपुर  होआना होगा। या फिर २४ मई तक चलें ताकि मैं सिरपुर होकर लौट आउँ। भोपाल से पत्र आने पर शीघ्र लिखें। सबको मेरे प्रणाम।
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Revision as of 10:42, 15 February 2020

This is one of hundreds of letters Osho wrote to Ma Anandmayee, then known as Madan Kunwar Parekh. It was written in the evening of 5th May 1961 on the same new letterhead as Letter written on 4 May 1961 am. It features only "रजनीश" (Rajneesh) in the top left area, in a heavy but florid font, and "115, Napier Town, Jabalpur (M.P.) in the top right, in a lighter but still somewhat florid font.

Osho's salutation in this letter is "पूज्य मां", Pujya Maan, Revered Mother, the new normal for this period. Letter has a blue number 1 a circle in the top right corner, as well as a pale blue mark in the top middle which comes out as "26" in a mirror. (See Talk:Letter written on 25 Apr 1961 om for more on what that might signify.)

Letters to Anandmayee 820.jpg

रजनीश
११५, नेपियर टाउन
जबलपुर (म. प्र.)

रात्रि. ५ मई १९६१

पूज्य मां,
प्रणाम। कल दोपहर आपका पत्र मिला। यह मैं जानता हूँ कि आपके शुभाशीशों की छाया सदा मेरे उपर रहने को है। उसे मैं प्रभु की अनुकम्पा ही मानता हूँ। स्वप्न में मैं आपको मेरे लिए दुखी होते देखा हूँ इसलिए ऐसा लिखा था। यह तो निश्चित है कि दुख से हमें उपर उठना है और इसलिए उस सबसे भी उपर उठना आवश्यक है जो कि दुख का कारण बन सकता है।

मैं शांत मन हूँ और जीवन के मधुर गीत को दिन दिन अधिक पूर्णता से सून पारहा हूँ।

सिरपुर (खानदेश) में होरहे एक सम्मेलन के आयोजक पीछे पड़े हैं। २० मई को एक दिन के लिए वहां जाना पड़ेगा। पचमढ़ी कब चलना है यह सूचित करें। १० मई को चलती हैं तब मुझे वहीं से सिरपुर होआना होगा। या फिर २४ मई तक चलें ताकि मैं सिरपुर होकर लौट आउँ। भोपाल से पत्र आने पर शीघ्र लिखें। सबको मेरे प्रणाम।

रजनीश
के
प्रणाम


See also
(?) - The event of this letter.
Letters to Anandmayee - Overview page of these letters.