Letter written on 5 Oct 1960

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This is one of hundreds of letters Osho wrote to Ma Anandmayee, then known as Madan Kunwar Parakh. It was written on 5th October 1960, on his personal letterhead stationery of the day: The top left corner reads: Rajneesh / Darshan Vibhag (Philosophy Dept) / Mahakoshal Mahavidhalaya (Mahakoshal University). The top right reads: Nivas (Home) / Yogesh Bhavan, Napiertown / Jabalpur (M.P.). Many of his letters on this letterhead have had the number 115 added in by hand before "Yogesh Bhavan" to complete his address; this is one of them.

This letter has none of the marks and numbers that have been found in some other letters except a pale blue figure of unknown significance on the right side. Osho's usual salutation, "प्रिय मां" (Priya Maan, Dear Mom), is also used here. And the letterhead has been printed on paper with a watermark, "JUPITER BOND".

This letter has been published, in Bhavna Ke Bhojpatron Par Osho (भावना के भोजपत्रों पर ओशो) on p 61 (2002 Diamond edition).

Letters to Anandmayee 807.jpg

रजनीश                   निवास:
दर्शन विभाग               ११५, योगेश भवन, नेपियर टाउन
महाकोशल महाविद्यालय         जबलपुर (म. प्र.)

प्रिय मां,
पद-स्पर्श। आपकी स्नेह-पाती मिली। आप मुझे निकट देखना चाहती हैं – मेरा भी मन आने को और आपके स्नेह को पाने के लिए लालायित है। मेरा बड़ा होना आपकी प्रेम-अभिव्यक्ति में बाधा नहीं बनेगा – मां के सामने भी क्या कोई कभी बड़ा होपाता है? मैं दिसम्बर की छुट्टियों में आने को हूँ – वैसे दूर तो अब भी कहां हूँ। शरीर ही दूर है, हृदय तो नहीं। हृदय कोई दूरी नहीं मानता है – समय और स्थान की धारणायें उसके प्रसंग में कोई अर्थ नहीं रखती हैं। प्रेम है तो कोई दूरी दूरी नहीं होती है और प्रेम नहीं है तो शरीर निकट भी हो तो क्या कोई निकट आपाता है?

मैं प्रसन्न और स्वस्थ हूँ। प्रभु से आपको स्वस्थ और स्व-स्थित बनाये रखने की कामना करता हूँ।
सबको मेरे विनम्र प्रणाम।

रजनीश के प्रणाम
५ अक्तू. १९६०

Partial translation
"I will be visiting in the holidays of December."
See also
Bhavna Ke Bhojpatron ~ 005 - The event of this letter.
Letters to Anandmayee - Overview page of these letters.