Letter written on 5 Sep 1961 pm

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This is one of hundreds of letters Osho wrote to Ma Anandmayee, then known as Madan Kunwar Parakh. It was written in the evening of 5th September 1961. The letterhead has a simple "रजनीश" (Rajneesh) in the top left area, in a heavy but florid font, and "115, Napier Town, Jabalpur (M.P.) in the top right, in a lighter but still somewhat florid font.

Osho's salutation in this letter is just plain "मां", Maan, Mom or Mother. It has a couple of the hand-written marks that have been observed in other letters: a blue number (20) in a circle in the top right corner and a red tick mark, plus it has a new variation on a previous theme: Instead of a pale blue mirror-image number or mystery mark -- pale blue and mirror image arising because of writing showing through from the back side of the paper -- there is a black, straight (non-mirrored) "45". 45 fits more or less as a number with other recent pale blue mirror-image numbers but the marking method has changed, a change which persists with at least the next two letters. See Letter written on 2 Sep 1961 pm and its Talk page for more on this.

Letters to Anandmayee 841.jpg

रजनीश
११५, नेपियर टाउन
जबलपुर (म. प्र.)

मां,
प्रणाम। दिन भरकी बर्षा के बाद रात खूब ठंडी हो गई है। बिजली अचानक बुझ गई है और घने अंधेरे में आकाश में चमक आये तारे बड़े भले लग रहे हैं।

शहर मिट गया है और ग्राम-की-सी शांति उतर आई है।

एकांत रास्तो पर घूम रहा हूँ। कुछ मित्र साथ है पर मैं उनके साथ नहीं हूँ। एक क्षण होता हैं जब हम जानते हैं कि हम अकेले हैं। पूरे भरे जगत में अकेलापन होआता है।

मनुष्य-चेतना अकेली है : इस एकाकीपन से पलायन के लिए ही मनुष्य के सब आयोजन हैं। जबतक आयोजन चलते है तबतक दुख और पीड़ा होती है : फिर जिस दिन अकेलेपन से ही साथ और मैत्री हो आती है, दुख मिट जाता है।

शांति का अर्थ है अपने आंतरिक अकेलेपन को स्वीकार कर लेना – सहज मन से : जो है उससे पलायन में कोई अर्थ नहीं है।

“जो है” उसे जान लेना ही मुक्त हो जाना है। मुक्ति पाई नहीं जाती; ज्ञान मुक्ति दे देता है। ईसा का वचन है : ‘सत्य तुम्हें मुक्ति देगा।‘

मैं मुक्त हूं और आनंद में हूँ।

रजनीश के प्रणाम

रात्रि:
५ सित. ‘६१

See also
Letters to Anandmayee ~ 17 - The event of this letter.
Letters to Anandmayee - Overview page of these letters.