Letter written on 6 Oct 1961

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This is one of hundreds of letters Osho wrote to Ma Anandmayee, then known as Madan Kunwar Parakh. It was written on 6th October 1961. The letterhead has a simple "रजनीश" (Rajneesh) in the top left area, in a heavy but florid font, and "115, Napier Town, Jabalpur (M.P.) in the top right, in a lighter but still somewhat florid font.

Osho's salutation in this letter is a simple "मां", Maan, Mom or Mother. It has a few of the hand-written marks that have been observed in other letters: a blue number (24) in a circle in the top right corner, a red tick mark, and a second number (50) in the bottom right corner.

Letters to Anandmayee 848.jpg

रजनीश
११५, नेपियर टाउन
जबलपुर (म. प्र.)

मां,
राह सुन्दर है और कार की खिड़कियों से पीछे छूटते दरख्त, नदी नाले और पहाड़ी झरने भले लग रहे हैं। सुबह की जागती बेला में इस शांत वन-प्रांत ने मन को भी शांत कर दिया है।

एक सर्व-धर्म-सम्मेलन से बोलकर लौट रहा हूँ। मैं कहा हूँ कि धर्म एक ही है और एक ही हो सकता है। अनेकता जहां है वहां धर्म नहीं है, धर्म का नाम मात्र है। संप्रदाय धर्म विरोधी हैं : वे धर्म की शुद्ध भूमि तक पहुँचने में बाधायें हैं। प्रत्यक सीमा बाधा है; कारण, धर्म असीम की उपलब्धि के लिए जो है।

हम जो जानते हैं, हम जो हैं – वह सब लेकर धर्म तक, सत्य तक नहीं पहुँचा जा सकता है। अज्ञात को पाने के लिए ज्ञात को छोड़ना आवश्यक है। शून्य, शांत और संस्कार मुक्त चित्त में ही सत्य का अवतरण हो सकता है। हम मिटते हैं तब सत्य आता है।

धर्म नया जन्म है इसलिए धर्म पुराने की मृत्यु भी है।

रजनीश के प्रणाम

६ अक्तू. १९६१

(पुनस्च:
श्री पारखजी का पत्र मिला है। गांव पर मां की तबियत ठीक नहीं है इसलिए छुट्टियों में वहीं जाकर रहना है फिर भी संभव हुआ तो चांदा के लिए २-३ दिन का समय निकालूंगा। बुलढ़ाना से भी देशलहारा जी का पत्र है कि यदि चांदा आता हूँ तो एक दिन के लिए वहां भी चलना है।)

Partial translation
"After speaking at one ‘sarv-dharm-sammelan’ (an all religion forum) I am returning back. I have said that the religion is only one and it can be one only – where there is diversity religion is not there, only religion for name sake is there."
...
PS:
The letter of Shree Parakh Ji is received. At the village, mother’s health is not good, hence I will be staying there in the holidays; still if possible then, I will find out 2-3 days’ time for Chanda. There is a letter of Deshalhara Ji from Buldhana that if I come to Chanda then I would have to go for one day there too."


See also
Letters to Anandmayee ~ 21 - The event of this letter.
Letters to Anandmayee - Overview page of these letters.