Letter written on 8 Jul 1965 om

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Letter written to Ma Yoga Sohan on 8 Jul 1965 in the afternoon. It is said also to be in line to be published eventually in a larger edition of Prem Ke Swar (प्रेम के स्वर) (as letter #36), though this development appears not to be fast-tracked.

Sohan img590.jpg

आचार्य रजनीश

प्यारी सोहन,
प्रेम। तेरा पत्र मिला है। मेरे पत्र के लिए बहुत प्रतीक्षा करनी पड़ी ? अब मैं तेरे लिए २३ जुलाई की प्रतीक्षा कर रहा हूँ। वही अंतिम डब्बा -- और तू सामान लिये खड़ी है -- मुझे तो सब दिखाई पड़ रहा है ! पता नहीं, मेरे खाने के लिए क्या लारही है ?

माणिक बाबू को प्रेम। मैं आशा करता हूँ कि उन्होने श्री रमणभाई को फोन करके तेरी यात्रा-व्ववस्था के लिए कह ही दिया होगा। बच्चों को आशीष।

मैं कोशिश तो यही करता हूँ कि मेरे पत्र तुझे जल्दी जल्दी मिल जावें और तुझे प्रतीक्षा न करनी पड़े, लेकिन कभी देर हो तो प्रतीक्षाकर अपने आपको परेशान मत किया कर -- पत्र एकाध - दो दिन की देर से पहुँच ही जावेगा। शेष शुभ।

रजनीश के प्रणाम

दोपहरः ८ जुलाई १९६५

Partial translation:

"Dear Sohan,
"Love! I have received your letter. You had to wait lot for my letter. Now I am waiting for 23rd July for you. The last coach and you are standing with the things – I am able to see everything! Don’t know what you are bringing for me to eat!
"Love to Manik Babu. I hope that he must have phoned to Shree Raman Bhai for making arrangements for your journey.
"Blessings to the kids."


See also
Letters to Sohan ~ 020 - The event of this letter.
Letters to Sohan and Manik - Overview page of these letters.