Mukta Gagan Ke Panchhi (मुक्‍त गगन के पंछी)

From The Sannyas Wiki
Jump to: navigation, search


ओशो द्वारा सूफी, झेन एवं उपनिषद की कहानियों एवं बोध-कथाओं पर दिए गए सुबोधगम्‍य 19 अमृत-प्रवचनों की श्रृंखला ‘बिन बाती बिन तेल’ में से संकलित पांच (16 से 19) प्रवचन। जिसके अनुसार बुद्धों के पास तुम पंख फड़फड़ाना न सीखो तो और कुछ सीखने को वहां है भी नहीं। यही तो प्रवचन है यही उनका संदेश है, कि तुम उड़ सकते हो मुक्‍त आकाश में। तुम मुक्‍त गगन के पक्षी हो। तुम व्‍यर्थ ही डरे हो। तुम भूल ही गए हो कि तुम्‍हारे पास पंख हैं तुम पैरों से चल रहे हो। तुम आकाश में उड़ सकते थे। थोड़ा फड़फड़ाओ ताकि तुम्‍हें भरोसा आ जाए। ध्‍यान फड़फड़ाहट है पंखों की, उन पंखों की जो उड़ सकते हैं, दूर आकाश में जा सकते हैं
notes
Originally published as ch.16-19 of Bin Bati Bin Tel (बिन बाती बिन तेल).
time period of Osho's original talks/writings
Jul 6, 1974 to Jul 9, 1974 : timeline
number of discourses/chapters
4   (see table of contents)


editions

Blank.jpg

Mukta Gagan Ke Panchhi (मुक्‍त गगन के पंछी)

Year of publication : 1991
Publisher : Diamond Pocket Books
ISBN
Number of pages :
Hardcover / Paperback / Ebook :
Edition notes :

Mukta Gagan Ke Panshi.jpg

Mukta Gagan Ke Panchhi (मुक्‍त गगन के पंछी)

Year of publication : 2003
Publisher : Diamond Pocket Books
ISBN 81-7182-229-0 (click ISBN to buy online)
Number of pages : 96
Hardcover / Paperback / Ebook : P
Edition notes :

table of contents

edition 2003
chapter titles
discourses
event location duration media
1 साधु, असाधु और संत 6 Jul 1974 am Lao Tzu balcony, Poona 1h 15min audio
2 अहंकार की उलझी पूंछ 7 Jul 1974 am Lao Tzu balcony, Poona 1h 15min audio
3 वासना-रहितता और विशुद्ध इंद्रियां 8 Jul 1974 am Lao Tzu balcony, Poona 1h 20min audio
4 चल उड़ जा रे पंछी 9 Jul 1974 am Lao Tzu balcony, Poona 0h 59min audio