Talk:Ashtavakra: Mahageeta, Bhag 3 (अष्‍टावक्र : महागीता, भाग तीन) (2)

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TOC for the 1990 edition:

1. मनुष्य है एक अजनबी
2. प्राण की यह बीन बजना चाहती है
3. हर जगह जीवन विकल है
4. धार्मिक जीवन -- सहज, सरल, सत्य
5. अचुनाव में अतिक्रमण है
6. संन्यास : अभिनव का स्वागत
7. जगत उल्लास है परमात्मा का
8. जागते-जागते जाग आती है
9. विषयों में विरसता मोक्ष है
10. धर्म अर्थात उत्सव
11. सहज है सत्य की उपलब्धि
12. श्रद्धा का क्षितिज : साक्षी का सूरज
13. प्रभु की प्रथम आहट -- निस्तब्धता में
14. शूल हैं प्रतिपल मुझे आगे बढ़ाते
15. धर्म एक आग है