Talk:Nav-Sannyas Kya? (नव-संन्यास क्या?)

From The Sannyas Wiki
Jump to: navigation, search

Current Understanding

event audio,
OshoWorld
audio,
Osho.com
1972 book edition 2006 book edition (*1) Shailendra's PDF (*2) Oshoganga (*2) Osho.com library OshoWorld e-book Other book editions Dates & Places
(for letters - addressees)
Krishna Meri Drishti Mein ~ 22 Krishna Smriti #22 Krishna Smriti 22. परिशिष्ट: नव-संन्यास 1. एक तरल, गैर-गंभीर व आनंद पूर्ण संन्यास का सूत्र-पात
28 Sep 1970 pm, med.camp Manali (H.P.)
1. नव-संन्यास का सूत्रपात
  • 1. नव-संन्यास का सूत्रपात
  • Krishna Smriti 22. नव-संन्यास
    additional meeting, 28 Sep 1970 pm
1. नव-संन्यास का सूत्रपात Krishna Smriti 22. नव-संन्यास 1. नव-संन्यास का सूत्रपात (p.1-24) 28 Sep 1970 pm, Manali (HP), meditation camp
Nav-Sannyas Kya ~ 01 Main Kahta Akhan Dekhi #5
beginning and end incomplete
1. संन्यासः नई दिशा, नया बोध
"No beginning, no ending, sound dropouts"
2. संन्यास : नयी दिशा, नया बोध
beginning and end incomplete
20 Oct 1970, Poona (Maharashtr.)
7. संन्यास : नयी दिशा, नया बोध 2. संन्यासः नयी दिशा, नया बोध
beginning and end incomplete
2. संन्यासः नयी दिशा, नया बोध
beginning and end incomplete
1. संन्यास: नई दिशा, नया बोध
beginning and end incomplete
2. संन्यास : नयी दिशा, नया बोध (p.24-31)
beginning and end incomplete
Main Kahta Aankhan Dekhi (मैं कहता आंखन देखी), 1979ed., ch.35 20 Oct 1970, Poona
Nav-Sannyas Kya ~ 04 4. "Audio Not Available" 3. संन्यास और संसार
first week of Nov 1970, Jabalpur residence
2. संन्यास और संसार 3. संन्यास और संसार 3. (no title) 4. संन्यास और संसार 3. संन्यास और संसार (p.32-49) Main Kahta Aankhan Dekhi (मैं कहता आंखन देखी), 1979ed., ch.36 1 - 7 Nov 1970, Kamala Nehru Nagar, Jabalpur
Suli Upar Sej Piya Ki ~ 04 Jyon Ki Tyon #9
first sentences are untranscribed
Jyon Ki Tyon Dhari Deenhi Chadariya 9. अचौर्य (प्रश्नोत्तर)
first sentences are untranscribed
4. संन्यास के फूल : संसार की भूमि में
(only last question)
13 and 14 Nov 1970, night, Cross Maidan, Bombay, fragments (*3)
3. संन्यास के फूल : संसार की भूमि में
(only last question)
  • 4. संन्यास के फूलः संसार की भूमि में
    (only last question)
  • Jyon Ki Tyon Dhari Dinhi Chadariya 9. अचौर्य (प्रश्नोत्तर)
Jyon Ki Tyon Dhari Dinhi Chadariya 9. अचौर्य Jyon Ki Tyon Dhari Deenhi Chadariya 9. अचौर्य (प्रश्नोत्तर)
(beginning of first question is complete)
4. संन्यास के फूलः संसार की भूमि में (p.49-65)
(only last question)
13 Nov 1970 am, Cross Maidan, Bombay (*3)
Nav-Sannyas Kya ~ 02 (*4) Main Kahta Akhan Dekhi #6
(it looks complete)
2. आनंद व अहोभाव में डूबा हुआ नव-संन्यास (first part, i.e. before 52:26) (*5)
(it looks complete)
5. आनन्द व अहोभाव में डूबा हुआ--नव-संन्यास
text edited, end incomplete
6 Dec 1970, Ahmedabad
8. आनंद व अहोभाव में डूबा हुआ नव-संन्यास
(complete)
5. आनंद व अहोभाव में डूबा हुआ नव-संन्यास
text edited, end incomplete
5. आनंद व अहोभाव में डूबा हुआ नव-संन्यास
text edited, end incomplete
2. आनंद व अहोभाव में डूबा हुआ नव-संन्यास
(complete)
5. आनंद व अहोभाव में डूबा हुआ नव-संन्यास (p.65-81)
text edited, end incomplete
Main Kahta Aankhan Dekhi (मैं कहता आंखन देखी), 1979ed., ch.38 6 Dec 1970 pm, Ahmedabad (*4)
This chapter is the compilation from two events: 6. संन्यास का एक नया अभियान
missing first question itself and text starts with its response
first weeks of Jan and Feb 1971, Bombay and Poona, two parts of discourses
4. संन्यास का एक नया अभियान 6. संन्यास का एक नया अभियान
  • 4. (no title)
    missing first question itself and text starts with its response
  • 6. (no title)
    missing first question itself and text starts with its response
6. संन्यास का एक नया अभियान (p.82-93)
beginning incomplete
Main Kahta Aankhan Dekhi (मैं कहता आंखन देखी), 1979ed., ch.39 3 Feb 1971 pm, Poona and 2 Jan 1971 pm, Cross Maidan, Bombay
Anant Ki Pukar ~ 02 Anant Ki Pukar #5 Anant Ki Pukar 2. एक एक कदम 7. संन्यास का एक नया आयाम : अल्प कालीन संन्यास
here is only beginning of the event
med.camp, Lonavala (Maharashtr.)
5. संन्यास की धारणा
here is only beginning of the event
  • 7. सावधिक संन्यास की धारणा (p.63-64)
    here is only beginning of the event
  • Anant Ki Pukar 5. अवधिगत संन्यास
  • 7. (no title, first part)
    here is only beginning of the event
  • Anant Ki Pukar 5. अवधिगत संन्यास
Anant Ki Pukar 2. अवधिगत संन्यास 7. सावधिक संन्यास की धारणा (p.94-96)
here is only beginning of the event
24 Dec 1967 am, Lonavala
Nav-Sannyas Kya ~ 03 Main Kahta Akhan Dekhi #7 2. पूरब की श्रेष्ठतम देन (second part, i.e. from 52:26) (*5)
(it looks complete)
8. मनुष्यता को पूरब की श्रेष्ठतम देन--संन्यास
3 Jul 1971, 7:45 pm, All India Radio, Bombay, radio weekly program "Manobhumi": "संन्यास मेरी दृष्टि में"
9. पूरब की श्रेष्ठतम देन : संन्यास
radio talk "संन्यास: मेरी दृष्टि में"
7. सावधिक संन्यास की धारणा (p.64-66) 7. (no title, middle part) 3. पूरब की श्रेष्ठतम देनः संन्यास 8. पूरब की श्रेष्ठतम देनः संन्यास (p.96-99) Main Kahta Aankhan Dekhi (मैं कहता आंखन देखी), 1979ed., ch.41 3 Jul 1971, 19:45, All India Radio, Bombay
Nav-Sannyas Kya ~ 05 5. "Audio Not Available" 9. संन्यास का निर्णय और ध्यान में छलांग
26 Nov 1971, Poona, before morning meditation, first half of q/a talk
6. संन्यास का निर्णय और ध्यान में छलांग 7. सावधिक संन्यास की धारणा (p.66-68) 7. (no title, last part) 5. संन्यास का निर्णय और ध्यान में छलांग 9. संन्यास का निर्णय और ध्यान में छलांग (p.99-103) Main Kahta Aankhan Dekhi (मैं कहता आंखन देखी), 1979ed., ch.42 26 Nov 1971 am, Poona
(below 39 letters to neo-sannyasins included to current chapters) 10. पात्र-पाथेय--संन्यासियों के लिए 10. पात्र-पाथेय : संन्यासियों के लिए (*1) 8. पत्र-पाथेय 10. पत्र-पाथेय (p.103-122) Main Kahta Aankhan Dekhi (मैं कहता आंखन देखी), 1979ed., ch.43
Prem Ke Phool ~ 139 1. वे इकट्ठे होंगे--जिनके लिए मैं आया हूँ 1. वे इकट्ठे होंगे--जिनके लिए मैं आया हूं 1. वे इकट्ठे होंगे--जिनके लिए मैं आया हूं Prem Ke Phool (प्रेम के फूल), 1970ed., ch.139 15 Oct 1970, to Ma Anand Madhu, Vishvanid, Ajol, Gujarat
Prem Ke Phool ~ 140 2. संघर्ष, संकल्प और संन्यास 2. संघर्ष, संकल्प और संन्यास 2. संघर्ष, संकल्प और संन्यास Prem Ke Phool (प्रेम के फूल), ch.140 25 Oct 1970, to Ma Anand Madhu, Vishvanid, Ajol, Gujarat
Prem Ke Phool ~ 149 3. संन्यासी बेटे का गौरव 3. संन्यासी बेटे का गौरव 3. संन्यासी बेटे का गौरव Prem Ke Phool (प्रेम के फूल), ch.149 15 Oct 1970, to Swami Anandmurti, Ahmedabad
Prem Ke Phool ~ 150 4. संन्यास की आत्मा है : अडिग, अचल और अभय होना 4. संन्यास की आत्मा हैः अडिग, अचल और अभय होना 4. संन्यास की आत्मा है : अडिग, अचल और अभय होना Prem Ke Phool (प्रेम के फूल), ch.150 15 Oct 1970, to Ma Yoga Samadhi, Rajkot, Gujarat
Prem Ke Phool ~ 146 5. संन्यास जीवन का परम-भोग है 5. संन्यास जीवन का परम-भोग है 5. संन्यास जीवन का परम-भोग है Prem Ke Phool (प्रेम के फूल), ch.146 15 Oct 1970, to Ma Yoga Priya, Vishvanid, Boriya Mahadev (Temple), gra. post -- Ajol, dist. Mehsana, Gujarat
Prem Ke Phool ~ 147 6. संन्यास नया जन्म है 6. संन्यास नया जन्म है 6. संन्यास नया जन्म है Prem Ke Phool (प्रेम के फूल), ch.147 11 Nov 1970, to Ma Yoga Yasha, Vishvanid, Ajol, Gujarat
Prem Ke Phool ~ 148 7. संसार में संन्यास का प्रवेश 7. संसार में संन्यास का प्रवेश 7. संसार में संन्यास का प्रवेश Prem Ke Phool (प्रेम के फूल), ch.148 12 Nov 1970, to Swami Prem Krishna, Vishvanid, Ajol, Gujarat
Antarveena ~ 030 8. संन्यास अर्थात् जीवन का समग्र स्वीकार 8. संन्यास अर्थात जीवन का समग्र स्वीकार 8. संन्यास अर्थात् जीवन का समग्र स्वीकार Antarveena (अंतर्वीणा), 1971ed., ch.30 12 Nov 1970, to Ma Yoga Prem, Vishvanid, Ajol, Gujarat
Antarveena ~ 031 9. संन्यास के संकल्प में अडिग रहो 9. संन्यास के संकल्प में अडिग रहो 9. संन्यास के संकल्प में अडिग रहो Antarveena (अंतर्वीणा), 1971ed., ch.31 17 Nov 1970, to Swami Anandmurti, per Mr Krishnavandan Rinragavala, Indian Bank, P.B. 257, Bhadra, Ahmedabad
Dhai Aakhar Prem Ka ~ 043 10. ईश्वर की पुकार से भर गये प्राणों में संन्यास का अवतरण 10. ईश्वर की पुकार से भर गए प्राणों में संन्यास का अवतरण 10. ईश्वर की पुकार से भर गए प्राणों में संन्यास का अवतरण Dhai Aakhar Prem Ka (ढ़ाई आखर प्रेम का), 1971ed., ch.43 19 Nov 1970, to Ma Dharmjyoti, Bombay
Prem Ke Phool ~ 130 11. संसार को अभिनय जानना ही संन्यास है 11. संसार को अभिनय जानना ही संन्यास है 11. संसार को अभिनय जानना ही संन्यास है Prem Ke Phool (प्रेम के फूल), ch.130 26 Nov 1970, to Ma Yoga Priya, Vishvanid, Boriya Mahadev (Temple), gra. post Ajol, dist. Mehsana, Gujarat
Antarveena ~ 050 12. संन्यास सबसे बड़ा विद्रोह है 12. संन्यास सबसे बड़ा विद्रोह है 12. संन्यास सबसे बड़ा विद्रोह है Antarveena (अंतर्वीणा), 1971ed., ch.50 16 Dec 1970, to Swami Krishna Kabeer, Ahmedabad
Antarveena ~ 057 13. खिलना--संन्यास के फूल का 13. खिलना--संन्यास के फूल का 13. खिलना--संन्यास के फूल का Antarveena (अंतर्वीणा), 1971ed., ch.57 17 Dec 1970, to Anupanand M. Shah, now Swami Amrit Bodhisatva, Surendranagar, Gujarat
Antarveena ~ 074 14. ध्यान, प्रेम और संन्यास का फूल 14. ध्यान, प्रेम और संन्यास का फूल 14. ध्यान, प्रेम और संन्यास का फूल Antarveena (अंतर्वीणा), 1971ed., ch.74 27 Dec 1970, to B.B.V. Turakhiya, 381, Raviwar Peth, Poona, Maharashtra
Antarveena ~ 079 15. संसार को लीला मात्र जानना संन्यास है 15. संसार को लीला मात्र जानना संन्यास है 15. संसार को लीला मात्र जानना संन्यास है Antarveena (अंतर्वीणा), 1971ed., ch.79 27 Dec 1970, to Ms Hansa Manikant Khona, now Sadhvi Yoga Hansa, 262/270, Narsi Mehta Road, Bombay-9
Antarveena ~ 127 16. संन्यास भी ध्यान का एक मार्ग है 16. संन्यास भी ध्यान का एक मार्ग है 16. संन्यास भी ध्यान का एक मार्ग है Antarveena (अंतर्वीणा), 1971ed., ch.127 7 Jan 1971, to Mr Radhakant Nagar, 1740, Ramagali, Sabzi Mandi, Sohan Ganj, Delhi-7
Antarveena ~ 141 17. कोयले जैसी चेतना को हीरा-जैसा बनाने की कीमिया है--संन्यास 17. कोयले जैसी चेतना को हीरे जैसा बनाने की कीमिया है--संन्यास 17. कोयले-जैसी चेतना को हीरे-जैसा बनाने की कीमिया है--संन्यास Antarveena (अंतर्वीणा), 1971ed., ch.141 9 Jan 1971, to Ma Yoga Prem, Vishvanid, Ajol, Gujarat
Dhai Aakhar Prem Ka ~ 048 18. संन्यास की आत्मा--स्वतंत्रता में 18. संन्यास की आत्मा--स्वतंत्रता में 18. संन्यास की आत्मा--स्वतंत्रता में Dhai Aakhar Prem Ka (ढ़ाई आखर प्रेम का), 1971ed., ch.48 9 Jan 1971, to Ma Yoga Maya, Vishvanid, Ajol
Dhai Aakhar Prem Ka ~ 063 19. संन्यास है कर्ता-मुक्त दृष्टि 19. संन्यास है कर्ता-मुक्त दृष्टि 19. संन्यास है कर्त्ता-मुक्त दृष्टि Dhai Aakhar Prem Ka (ढ़ाई आखर प्रेम का), 1971ed., ch.63 14 Jan 1971, to Sw Yoga Murti, Vishvanid, Ajol
Dhai Aakhar Prem Ka ~ 097 20. संन्यास संकल्प नहीं, समर्पण है 20. संन्यास संकल्प नहीं, समर्पण है 20. संन्यास संकल्प नहीं, समर्पण है Dhai Aakhar Prem Ka (ढ़ाई आखर प्रेम का), 1971ed., ch.97 22 Jan 1971, to Mr Shiv, now Swami Ageh Bharti, Jabalpur, MP
Dhai Aakhar Prem Ka ~ 101 21. मन है संन्यास का तो डूबो 21. मन है संन्यास का तो डूबो 21. मन है संन्यास का तो डूबो Dhai Aakhar Prem Ka (ढ़ाई आखर प्रेम का), 1971ed., ch.101 23 Jan 1971, to Mr Shiv, now Swami Ageh Bharti, Jabalpur, MP
Dhai Aakhar Prem Ka ~ 116 22. संन्यास में छलांग 22. संन्यास में छलांग 22. संन्यास में छलांग Dhai Aakhar Prem Ka (ढ़ाई आखर प्रेम का), 1971ed., ch.116 24 Jan 1971, to Dr. Savitri Patel, post : Killa Pardi, dist. Balasar, Gujarat
Dhai Aakhar Prem Ka ~ 119 23. ध्यान की गहराई के साथ ही संन्यास-चेतना का आगमन 23. ध्यान की गहराई के साथ ही संन्यास-चेतना का आगमन 23. ध्यान की गहराई के साथ ही संन्यास-चेतना का आगमन Dhai Aakhar Prem Ka (ढ़ाई आखर प्रेम का), 1971ed., ch.119 25 Jan 1971, to Mr Sevantilal C. Shah, now Swami Anand Muni, Ahmedabad, Gujarat
Pad Ghunghru Bandh ~ 075 24. संन्यास है--मन से मनातीत में यात्रा 24. संन्यास है--मन से मनातीत में यात्रा 24. संन्यास है--मन से मनातीत में यात्रा Pad Ghunghru Bandh (पद घुंघरू बांध), 1974ed., ch.75 18 Feb 1971, to Swami Anand Vijay, Jabalpur
Pad Ghunghru Bandh ~ 077 25. संन्यास और गृहस्थी का मेल परमात्मा पर छोड़ 25. संन्यास और गृहस्थी का मेल परमात्मा पर छोड़ 25. संन्यास और गृहस्थी का मेल परमात्मा पर छोड़ Pad Ghunghru Bandh (पद घुंघरू बांध), 1974ed., ch.77 18 Feb 1971, to Sau. Sadhana Belapurkar, now Ma Amrit Sadhana, Poona
Pad Ghunghru Bandh ~ 107 26. अन्तः संन्यास का संकल्प 26. अंततः संन्यास का संकल्प 26. अन्तत: संन्यास का संकल्प Pad Ghunghru Bandh (पद घुंघरू बांध), 1974ed., ch.107 25 Feb 1971, to Mrs Sumitra Ji, per : Mr Brajbhushandas-Narayandas Kansara, Anand Kutir, Lunsikui, Gujarat
Pad Ghunghru Bandh ~ 113 27. संन्यास है रूपान्तरण की कीमिया 27. संन्यास है रूपांतरण की कीमिया 27. संन्यास है रूपांतरण की कीमिया Pad Ghunghru Bandh (पद घुंघरू बांध), 1974ed., ch.113 26 Feb 1971, to Swami Vijay Murti, Poona
Pad Ghunghru Bandh ~ 116 28. नव-संन्यास को समझने में पुरानी धारणाओं की कठिनाइयाँ 28. नव-संन्यास को समझने में पुरानी धारणाओं की कठिनाइयां 28. नव-संन्यास को समझने में पुरानी धारणाओं की कठिनाइयां Pad Ghunghru Bandh (पद घुंघरू बांध), 1974ed., ch.116 26 Feb 1971, to Ma Dharm Saraswati, Poona-4
Pad Ghunghru Bandh ~ 121 29. संन्यास है--जीवन को उत्सव बना लेने की कला 29. संन्यास है--जीवन को उत्सव बना लेने की कला 29. संन्यास है--जीवन को उत्सव बना लेने की कला Pad Ghunghru Bandh (पद घुंघरू बांध), 1974ed., ch.121 26 Feb 1971, to Swami Bhakti Vedant, Ahmedabad
Pad Ghunghru Bandh ~ 136 30. स्वयं की खोज ही संन्यास है 30. स्वयं की खोज ही संन्यास है 30. स्वयं की खोज ही संन्यास है Pad Ghunghru Bandh (पद घुंघरू बांध), 1974ed., ch.136 6 Mar 1971, to Ma Yoga Uma, Poona
Ghoonghat Ke Pat Khol ~ 036 31. संसार और संन्यास में द्वैत नहीं है 31. संसार और संन्यास में द्वैत नहीं है 31. संसार और संन्यास में द्वैत नहीं है Tattvamasi (तत्त्वमसि), 1975ed., part 4, ch.36 8 Mar 1971, to Swami Ageh Bharti, Jabalpur
Ghoonghat Ke Pat Khol ~ 046 32. नया नाम--पुराने से तादात्म्य तोड़ने के लिए 32. नया नाम--पुराने से तादात्म्य तोड़ने के लिए 32. नया नाम--पुराने तादात्म्य तोड़ने के लिए Tattvamasi (तत्त्वमसि), 1975ed., part 4, ch.46 9 Mar 1971, to Ma Yoga Sambodhi, Jabalpur
Ghoonghat Ke Pat Khol ~ 052 33. संन्यासी जायेंगे अमृत संदेश बाँटने 33. संन्यासी जाएंगे अमृत संदेश बांटने 33. संन्यासी जाएंगे अमृत संदेश बांटने Tattvamasi (तत्त्वमसि), 1975ed., part 4, ch.52 10 Mar 1971, to Ma Yoga Taru, Bombay
Ghoonghat Ke Pat Khol ~ 065 34. गैरिक वस्त्र साधक के लिए मंगलदायी 34. गैरिक वस्त्र साधक के लिए मंगलदायी 34. गैरिक वस्त्र साधक के लिए मंगलदायी Tattvamasi (तत्त्वमसि), 1975ed., part 4, ch.65 12 Mar 1971, to Swami Dinesh Bharti, 177/4, Range Hills, Khadki, Poona-20
Ghoonghat Ke Pat Khol ~ 068 35. नव-संन्यास आन्दोलन का महत् कार्य 35. नव-संन्यास आंदोलन का महत कार्य 35. नव-संन्यास आंदोलन का महत् कार्य Tattvamasi (तत्त्वमसि), 1975ed., part 4, ch.68 12 Mar 1971, to Ma Yoga Taru, Bombay
Ghoonghat Ke Pat Khol ~ 078 36. संन्यास के संस्कार--पिछले जन्मों के 36. संन्यास के संस्कार--पिछले जन्मों के 36. संन्यास के संस्कार--पिछले जन्मों के Tattvamasi (तत्त्वमसि), 1975ed., part 4, ch.78 13 Mar 1971, to Mr Ratnesh Agrawal, now Swami Anand Nirgun, hostel B./37 Government College of Engineering, Raipur, MP
Ghoonghat Ke Pat Khol ~ 096 37. प्रभु के द्वार पर कोई भी अपात्र नहीं है 37. प्रभु के द्वार पर कोई भी अपात्र नहीं है 37. प्रभु के द्वार पर कोई भी अपात्र नहीं है Tattvamasi (तत्त्वमसि), 1975ed., part 4, ch.96 2 Apr 1971, to Sau. Sadhana Belapurkar, now Ma Amrit Sadhana, Poona-5
Ghoonghat Ke Pat Khol ~ 111 38. सहजता ही संन्यास है 38. सहजता ही संन्यास है 38. सहजता ही संन्यास है Tattvamasi (तत्त्वमसि), 1975ed., part 4, ch.111 14 Apr 1971, to Swami Anand Alok, Sangamner, Maharashtra
Ghoonghat Ke Pat Khol ~ 122 39. संन्यास, प्यास और स्वयं का दाँव 39. संन्यास, प्यास और स्वयं का दांव 39. संन्यास, प्यास और स्वयं का दाँव Tattvamasi (तत्त्वमसि), 1975ed., part 4, ch.122 16 Apr 1971, to Mr Rajendra Khajanchi, Po. Savli, dist. Chandrapur, Maha.
Notes
(*1) Checked text of first 9 chapters as only they are available in google book. This edition has mentions to ch.34-43 of Main Kahta Aankhan Dekhi (मैं कहता आंखन देखी) according to its chapter order, which differs in 1972. 1996 and 2006 ed. of MKAD differs from first edition of 1979 ed.
(*2) Main Kahta Aankhan Dekhi for Shailendra's PDF and Oshoganga did not checked and skipped in order is not overload the table.
(*3) Only last question given in Nav-Sannyas Kya? book. The question looks solid and belongs to 13 Nov discourse. "Evening" time contradicts to Jagdish's info for Jyon Ki Tyon Dhari Dinhi Chadariya (ज्यों की त्यों धरि दीन्हीं चदरिया).
(*4) This talk listed in Hindi series of talks with dates (source document) as Nav Sannyas Kya Hai. Some other sources confirmes the date and place, see its talk.
(*5) 2nd and 3rd talks are selling as one audio #2 on osho.com.

Deliberations

Dates for talks and letters in this book are not known but letters at least appear to be in the period from September 1970, when Osho first gave sannyas "officially", to 1972. Source for the info on the 1972 edition is Neeten's Osho Source Book (Bibliography section).

In fact, there are a number of entries in Neeten's Biblio and Appendix sections that merit attention. Not all will be correct, since he has gathered material uncritically from many sources and at this point it is still largely unprocessed. But his sources for the Biblio are reasonably solid. Included are citations for variations on the title, which mean the same and have a good chance of being related. They are reproduced here:

≤ 1965, Jabalpur: Naye Sannyas (Neo-Sannyas)
1972: Naira-sannyasa kya? Bombay, Jevan Jagruti Kendra, 1972. 269 p. 21½ cm. Rs. 7.00. (NL Hindi card cat.; INB 1973: Nav-sannyas kya? comp. by Ma Yog Kranti; ed. by Svami Yog Cinmay. Bombay, Jivan jagriti kendra, 1972. 7.00. (H-73) 294.54 [1])

This second, more complicated entry indicates "'Naira'-sannyasa kya?" derives from the 1972 Nav-Sannyas Kya?, though naira is a word not encountered elsewhere, likely a transliteration problem or perhaps a non-Hindi word. Taking it at face value, since it is from the national library database, we have used its data for the article page here.

Also from Neeten in his Appendix, an individual discourse citation:

Nav Sannyas Kya. 23.12.1969pm. Lonavala.

There are two versions of TOC here, one from the G**gle Books peek inside the Diamond edition, one from the e-book, with a few notes below.

    e-book
Preface by Sw Chaitanya Keerti
1. नव-संन्यास का सूत्रपात (corresponds to Diamond # 1)  
2. संन्यास : नयी दिशा, नया बोध (Diamond # 7)
3. संन्यास और सार (Diamond # 2)
4. संन्यास के फूल : संसार की भूमि में (Diamond # 3)
5. आनंद व अहोभाव में डूबा हुआ नव-संन्यास (Diamond # 8)
6. संन्यास का एक नया अभियान (Diamond # 4)
7. सावधिक संन्यास की धरना (Diamond # 5)
8. पत्र-पाथेय (Diamond # 10)

 

    Diamond 2007
1. नव-संन्यास का सूत्रपात
2. संन्यास और सार
3. संन्यास के फूल : संसार की भूमि में
4. संन्यास का एक नया अभियान
5. सावधिक संन्यास की धरना
6. संन्यास का निर्णय और ध्यान में छलांग
7. संन्यास : नयी दिशा, नया बोध
8. आनंद व अहोभाव में डूबा हुआ नव-संन्यास  
9. पुरव की श्रेष्ठतम देन : संन्यास
10. पत्र-पाथेय

The last chapter of each is a collection of some 39 letters on the subject to various early sannyasins and other seekers. All but seven have named addressees but none are dated. Some may have appeared elsewhere. The name of the chapter may be of interest: transliterated, it reads Patra-Patheya. Patra is simple enough, meaning letter(s), but Patheya seems to be a fairly uncommon word, not known by all dictionaries, meaning roughly "provisions for the journey."

The note in the e-book about Chaitanya Keerti (author of the preface) states that he is editor of Osho Times International, which dates it after sometime in 1989, which suggests an edition in between the 1972 and 2007 ones. Possibly. It is not known whether this or another preface appears in the Diamond edition, as the pages in that part of the book are not shown.

There were two chapters in the Diamond edition not found in the e-book, 6 & 9. And at end of ch 1 in the Diamond edition is a note. Transliterated, it reads:

Nav-Sannyas Kya? :
Krishna Smriti pravachan 22 /
Main Kahta Aankhan Dekhi pravachan 34.

Pravachan means discourse. This clearly makes this book out to be a compilation, with a complication, namely that the MKAD discourse #34 mentioned has the same title as ch 1 in both TOC's above, so it's all a bit self-referential, with which one being a part of the other a bit unclear.

Meanwhile, it does not necessarily mean the whole book is a compilation. In fact, there are three audio discourses being offered for Nav-Sannyas in osho.com's audiobook section, and their titles correspond to #2 & 5 in the e-book (#7 & 8 in the Diamond book), and one not in the e-book (#9 in Diamond).

So the latest picture is part compilation of bits that may appear elsewhere, part original and unique talks, part letters and perhaps other material. -- updated doofus-9 21:45, 26 February 2017 (UTC)


Mysteriously, or perhaps just coincidentally, the title of one of these audio discourses also turns up as a chapter title (#29) in Shiksha Mein Kranti (शिक्षा में क्रांति), a book of social commentary on the theme of education. The title, #7 in the Diamond book version, drops its "संन्यास" before the colon and uses an alternative spelling of "नयी" but is otherwise the same.

This of course may mean very little, since titles do get re-used from time to time and the two chapters may be totally unrelated. But if they are related, it will be good to note that possible connection. Ya never know. And the chapter before this one in Shiksha is कम्यून-जीवन, or "Commune life", for more of this kind of resonance. If these two chapters are the same (and Shiksha came first) then it will increase the possibility that Nav-Sannyas is wholly a compilation. -- doofus-9 06:05, 12 March 2017 (UTC)

Checked ch.28 and 29 of Shiksha, they are different than chapters of this series.--DhyanAntar 13:53, 9 October 2020 (UTC)

The e-book on OSHO.com is called नव संन्यास क्या – Nav Sannyas Kya and has 5 chapters:

#1: संन्यासः नई दिशा, नया बोध
#2: आनंद व अहोभाव में डूबा हुआ नव-संन्यास
#3: पूरब की श्रेष्ठतम देन
#4: संन्यास और संसार
#5: संन्यास का निर्णय और ध्यान में छलांग

Osho.com library gives 1970 year in his Copyrights.--DhyanAntar 16:40, 6 October 2020 (UTC)