Undated Letter written to Sohan 02

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Letter written to Ma Yoga Sohan and is undated. Est. date can be in Mar 1965 - Jun 1968, see Letterhead - Letters table.

It is unknown if it has been published or not.

Sohan img647.jpg

प्रिय बहिन,
प्रेम। उसी जगह बैठा हूं जहाँ कल सुबह तू साथ थी। आज वह जगह तो खली ही है जहाँ तू बैठी थी लेकिन कहीं -- ह्रदय के किसी कोने में -- तू वैसे की वैसी ही उपस्थित है। और वह उपस्तिथि ही वास्तविक है जो की काल और क्षेत्र के परिवर्तन से परिवर्तित नहीं होता हैं।

आशा है की शेष यात्रा भी सकुशल हो गई होगी और यह पत्र तुम सबको स्वाश और प्रसन्न पायेगा।

माणिक बाबू को प्रेम। बच्चो को शुभाशीष।

रजनीश के प्रणाम


See also
Letters to Sohan ~ 007 - The event of this letter.
Letters to Sohan and Manik - Overview page of these letters.