Letter written on 1 Jul 1965: Difference between revisions

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Letter written to [[Ma Yoga Sohan]] on 1 Jul 1965. It is unknown if it has been published or not. We are awaiting a transcription and translation.
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आचार्य रजनीश
प्यारी सोहन,<br>
मैं कल चांदा से वापिस लौट आया हूँ। वहां सब तेरी याद करते थे। आते ही लिख़ने की सोचता था लेकिन नहीं लिख पाया। उसके दंड स्वरूप बहुत से विचार-पत्र आज इकठ्ठे ही लिख रहा हूँ !
मैं बहुत आनंद में हूँ। तेरे पत्र आते ही खोजे। मिल गये तो कितनी ख़ुशी हुई ? माणिक बाबू को प्रेम। बच्चों को आशीष। यात्रा में तेरी बहुत याद आती थी। फिर सोचा कि अब जल्दी ही तो तू मिल जाने को है ?
रजनीश के प्रणाम
१ जुलाई १९६५
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;Partial translation
:"I have returned back from Chanda yesterday."


;See also
;See also
:[[Letters to Sohan ~ 023]] - The event of this letter.
:[[Letters to Sohan ~ 017]] - The event of this letter.
:[[Letters to Sohan and Manik]] - Overview page of these letters.
 
[[Category:Manuscripts|Letter 1965-07-01]] [[Category:Manuscript Letters (hi:पांडुलिपि पत्र)|Letter 1965-07-01]]
[[Category:Unpublished Hindi (hi:अप्रकाशित हिंदी)|Letter 1965-07-01]]
[[Category:Newly discovered since 1990|Letter 1965-07-01]]

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Letter written to Ma Yoga Sohan on 1 Jul 1965. It is unknown if it has been published or not.

आचार्य रजनीश

प्यारी सोहन,
मैं कल चांदा से वापिस लौट आया हूँ। वहां सब तेरी याद करते थे। आते ही लिख़ने की सोचता था लेकिन नहीं लिख पाया। उसके दंड स्वरूप बहुत से विचार-पत्र आज इकठ्ठे ही लिख रहा हूँ !

मैं बहुत आनंद में हूँ। तेरे पत्र आते ही खोजे। मिल गये तो कितनी ख़ुशी हुई ? माणिक बाबू को प्रेम। बच्चों को आशीष। यात्रा में तेरी बहुत याद आती थी। फिर सोचा कि अब जल्दी ही तो तू मिल जाने को है ?

रजनीश के प्रणाम

१ जुलाई १९६५

Partial translation
"I have returned back from Chanda yesterday."
See also
Letters to Sohan ~ 017 - The event of this letter.
Letters to Sohan and Manik - Overview page of these letters.