Bhakti-Sutra, Bhag 1 (भक्ति-सूत्र, भाग एक)

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भक्ति यानी प्रेम- ऊर्ध्‍वमुखी प्रेम। भक्ति यानी दो व्‍यक्तियों के बीच का प्रेम नहीं, व्‍यक्ति और समष्टि के बीच का प्रेम। भक्ति यानी सर्व के साथ प्रेम में गिर जाना। भक्ति यानी सर्व को आलिंगन करने की चेष्‍टा। और, भक्ति यानी सर्व को आमंत्रण कि मुझे आलिंगन कर ले।
भक्ति कोई शास्‍त्र नहीं है- यात्रा है। भक्ति कोई सिद्धांत नहीं है-जीवन-रस है। भक्ति को समझ्‍ कर कोई समझ पाया नही। भक्ति में उूब कर ही कोई भक्ति के राज को समय पाता है।
प्रस्‍तुत पुस्‍तक ‘भक्ति सूत्र’ में ओशो द्वारा नारद-वाणी पर प्रश्‍नोत्‍तर सहित दिए गए दस अमृत प्रवचनो। को संकलित किया गया है।
notes
Talks on the Bhakti Sutras of Narada, way ancient verses expounding on the path of devotion. This book is the first of a two-volume set published separately possibly only once. For more info, see the combined book, Bhakti-Sutra (भक्ति-सूत्र), and its discussion page. (Includes a TOC and a quote from Books I Have Loved on Narada and his sutras.
time period of Osho's original talks/writings
Jan 11, 1976 to Jan 20, 1976 : timeline
number of discourses/chapters
10


editions

Bhakti-Sutra, Bhag 1 1976 cover.jpg

Bhakti-Sutra, Bhag 1 (भक्ति-सूत्र, भाग एक)

Year of publication : Mar 1976
Publisher : Rajneesh Foundation
Edition no. : 1
ISBN
Number of pages :
Hardcover / Paperback / Ebook :
Edition notes :