Difference between revisions of "Letter written on 15 Apr 1961 am"

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This is one of hundreds of letters Osho wrote to [[Ma Anandmayee]], then known as Madan Kunwar Parekh. It was written in the morning of 15th April 1961 on an unusual letterhead, perhaps related to a recent or upcoming event, similar to that of [[Letter written on 25 Nov 1960]]. The central part of the letterhead reads: "Sant Taaran Taran Jayanti Samaroha Samiti", Sant Taaran Taran Birthday Celebration Committee / "Karyalay" (Office) -- Digambar Shop, Jawaharganj, Jabalpur (M.P.). To the right of that: "Mantri" (secretary), RL Jain, MA, LLB. In the upper left corner is Osho's name, Acharya Rajneesh, with an uncertain designation above, possibly meaning something like "guest speaker".  
  
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This letter has been published, in ''[[Bhavna Ke Bhojpatron Par Osho (भावना के भोजपत्रों पर ओशो)]]'' on p 89 (2002 Diamond edition).
 
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मैं बम्बई हो आया हूँ। यात्रा सुखद और कार्यक्रम भला रहा है। श्री साहु श्रेयांशप्रसाद जी, अभयराज जी बलदोटा, येकाजी और ताराचंद भाई से बाल सेवा मंदिर के सम्बंध में भी बातें हुई हैं। उन सबकी सहानुभूति उपलब्ध हो सकती है।
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चांदा आने की बात पिछले पत्र में आप लिखीं थी। गर्मियों में तो डर लगता है! पचमढ़ी फिर आप आ ही रही हैं। पचमढ़ी यदि आने की बात न हो तो मैं चांदा आजाऊंगा। अच्छा तो यही है कि १०-१५ दिन पचमढ़ी रहें।
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Revision as of 07:02, 15 February 2020

This is one of hundreds of letters Osho wrote to Ma Anandmayee, then known as Madan Kunwar Parekh. It was written in the morning of 15th April 1961 on an unusual letterhead, perhaps related to a recent or upcoming event, similar to that of Letter written on 25 Nov 1960. The central part of the letterhead reads: "Sant Taaran Taran Jayanti Samaroha Samiti", Sant Taaran Taran Birthday Celebration Committee / "Karyalay" (Office) -- Digambar Shop, Jawaharganj, Jabalpur (M.P.). To the right of that: "Mantri" (secretary), RL Jain, MA, LLB. In the upper left corner is Osho's name, Acharya Rajneesh, with an uncertain designation above, possibly meaning something like "guest speaker".

Osho's salutation in this letter is "पूज्य मां", Pujya Maan, Revered Mother, which may be the new usual for this period. There are none of the handwritten marks of various colours found on most earlier letters except a couple of pale blue squiggles in the middle, of unknown significance, and which may actually be on the back of the letter.

This letter has been published, in Bhavna Ke Bhojpatron Par Osho (भावना के भोजपत्रों पर ओशो) on p 89 (2002 Diamond edition).

Letters to Anandmayee 815.jpg

अध्यक्ष
आचार्य रजनीश

संत तारण तरण जयंती समारोह समिति
कार्यालय – दिगम्बर शॉप, जवाहरगंज, जबलपुर
(म. प्र.)

मंत्री
आर. एल. जैन
एम. ए., एलएल. बी.

पूज्य मां,
प्रणाम। कल संध्या पत्र मिला है। मैं पत्र दिया था; प्रभु जाने उसका क्या हुआ? आप बाट देखती रहीं – मुझे क्या पता कि भेजा पत्र पहुँचने को नहीं है। मैं आज ही तत्सम्बंध में पोस्ट ऑफिस के अधिकारियों को लिख रहा हूँ – कुछ और पत्र भी इसी भांति गुम गए हैं।

xxx

मैं बम्बई हो आया हूँ। यात्रा सुखद और कार्यक्रम भला रहा है। श्री साहु श्रेयांशप्रसाद जी, अभयराज जी बलदोटा, येकाजी और ताराचंद भाई से बाल सेवा मंदिर के सम्बंध में भी बातें हुई हैं। उन सबकी सहानुभूति उपलब्ध हो सकती है।

xxx

चांदा आने की बात पिछले पत्र में आप लिखीं थी। गर्मियों में तो डर लगता है! पचमढ़ी फिर आप आ ही रही हैं। पचमढ़ी यदि आने की बात न हो तो मैं चांदा आजाऊंगा। अच्छा तो यही है कि १०-१५ दिन पचमढ़ी रहें।

शेष शुभ। मैं प्रसन्न हूँ। सबको मेरे प्रणाम।

रजनीश
के
प्रणाम

१५ अप्रिल १९६१
प्रभात


See also
(?) - The event of this letter.
Letters to Anandmayee - Overview page of these letters.