Letter written on 15 Oct 1970 (Samadhi)

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Osho wrote many letters in Hindi to Ma Yoga Samadhi which were published in various letter collections. This one is dated 15th October 1970 and was published in Prem Ke Phool (प्रेम के फूल) as letter #150. The wiki's image is a photo of a copy, thus it is not the highest quality and it has lost its colours.

The letterhead gives Osho's address as CCI Chembers [sic] in Bombay, with his name rendered as Acharya Rajaneesh. The logo is a one-colour version of the Jeevan Jagriti Kendra logo (was dark green), but a different colour than the name and address (was dark blue). Not many letters were written using this letterhead, as it was soon replaced with a version with "Chambers" and "Rajneesh".

Acharya Rajaneesh

27, C. C. I. CHEMBERS BOMBAY-20 PHONE NO. : 293782

प्रिय योग समाधि,
प्रेम। सन्यास गौरीशंकर की यात्रा है।

चढ़ाई में कठिनाइयां तो हैं हीं।

लेकिन, दृढ़ संकल्प के मीठे फल भी हैं।

सब शांति और आनंद से झेलना।

लेकिन, संकल्प नहीं छोड़ना।

मां की सेवा करना।

पहले से भी ज्यादा।

सन्यास दायित्वों से भागने का नाम नहीं है।

परिवार नहीं छोड़ना है, वरन् सारे संसार को ही परिवार बनाना है।

मां को भी सन्यास की दिशा में उन्मुख करना।

कहना उनसे : संसार बहुत देखा अब प्रभु की ओर आंखें उठाओ।

और तेरी ओर से उन्हें कोई कष्ट न हो, इसका ध्यान रखना।

लेकिन, इसका अर्थ झुकना या समझौता करना नहीं है।

सन्यास समझौता जानता ही नहीं है।

अडिग और अचल और अभय -- यही सन्यास की आत्मा है।

रजनीश के प्रणाम

१५/१०/१९७०

Letter-Oct-15-1970-Samadhi.jpg


See also
Prem Ke Phool ~ 150 - The event of this letter.