Letter written on 17 Aug 1966

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Letter written to Ma Yoga Sohan on 17 Aug 1966. It is unknown if it has been published or not.

Sohan img608.jpg

प्यारी सोहन,
तेरा पत्र मिला तो धीरज बंधा। जिस दिन मैंने सुबह ही देवी-देवताओं से पुकार की,उसी दिन मिला इससे तेरा चमत्कार मान और भी आनंद हुआ !

सच ही तू बड़ी चमत्कारी है। यही आश्चर्य है की औरों को यह पता क्यों नहीं है ?

देख ! माणिक बाबू तक को तेरे चमत्कारों की कोई खबर नहीं है ! वे बेचारे अभीतक तुझे देवी न मान,अपनी पत्नी ही माने जारहे हैं। लेकिन, अब इसके लिए कुछ करना ही होगा। सत्य का सभी को पता चलना चाहिए न ?

महासति चन्दनकुंवर का पत्र मिला है। उसका प्रत्युत्तर साथ है।

मैं १४ सित. पूना पहुँच रहा हूँ, संध्या को। केवल १५-१६ वहां रहूँगा। १६ की संध्या बम्बई के लिए निकलूंगा। थोड़ा ही समय पूना में है और चन्दना जी को मिलना संभव होसके ऐसी व्यवस्था कर लेना। संभव हो और यदि वे दो दिन अपने निकट ही कहीं आकर रुक सकें तो अच्छा है। 'स्पार्टन' लक्जुरी' में ही यदि कोई फ्लेट खाली हो,तो उन्हें वही ठहराया जा सकता है।

माणिक बाबू को प्रेम। बच्चों को आशीष।

श्री० पुंगलियाजी को फोन से इतना कह देना कि मैंने पारसमल जी बोरा को नासिक पत्र लिख दिया है।

रजनीश के प्रणाम

१७/८/१९६६

Partial translation
"Received the letter of Mahasati Chandan Kunvar Ji. The reply to her is enclosed here with. (Note: this is letter Pad Ghunghru Bandh ~ 004.)
I am reaching Poona in the evening on 14th Sep. Will stay only on 15-16 there. Will start for Bombay on 16th evening. Only little time is there in Poona and make arrangement such that we can meet Chandana Ji. If it is possible and if she comes somewhere near to us and stay it’s better. If any flat is vacant in ‘Spartan Luxury’ then she can be accommodated there.
Love to Manik Babu. Blessings to the children.
Inform Shree Punagaliya Ji over a phone that I have already written a letter to Parasmal Ji at Nashik.
Rajneesh Ke Pranam
17/8/1966"
See also
Letters to Sohan ~ 073 - The event of this letter.
Letters to Sohan and Manik - Overview page of these letters.