Letter written on 19 May 1965 (Sohan)

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Letter written to Ma Yoga Sohan on 19 May 1965. It is unknown if it has been published or not.

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प्रिय बहिन,
प्रेम। तेरी चार पंक्तिया मिली हैं। प्रवास आनंद से हुआ है, इससे प्रसन्न हूँ। जीवन - प्रवास भी आनंद से हो, यही कामना है। जीवन भी एक यात्रा और प्रवास ही है। उसे जो निवास समझ लेते हैं, वे बहुत भूल और बहुत दुःख में पड़ जाते हैं। प्रवास को मात्र प्रवास ही जनना बहुत बड़ी मुक्ति है।

वहां सबको मेरे प्रणाम कहना

तेरे आगमन की प्रतीक्षा है।

रजनीश के प्रणाम

१९/५/१९६५


See also
Letters to Sohan ~ 011 - The event of this letter.
Letters to Sohan and Manik - Overview page of these letters.