Letter written on 22 Mar 1962 pm

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This is one of hundreds of letters Osho wrote to Ma Anandmayee, then known as Madan Kunwar Parakh. It was written on 22 Mar 1962 in evening.

This letter has been published in Krantibeej (क्रांतिबीज) as letter 21 (edited and trimmed text) and later in Bhavna Ke Bhojpatron Par Osho (भावना के भोजपत्रों पर ओशो) on p 107 (2002 Diamond edition).

The PS reads: "Your letter has been received. Have to come to Jaipur. I will start by Jabalpur-Bina Passenger at night on 5 April which will be reaching Bina at 6:30 in the morning on 6 April. Will get Punjab Mail at 9:30, there - that will be reaching Agra in the evening. From Agra will be getting the express for Jaipur that would be reaching at 4 o'clock in the morning at Jaipur, on 7 April. You start in the morning by G. T. on 5 April and wait for me at Bina. From Bina will be getting together. Only inconvenience would be that you have to wait for 6-7 hours at Bina."

Letters to Anandmayee 982.jpg

रजनीश

११५, नेपियर टाउन
जबलपुर (म.प्र.)

प्रिय मां,
सांझ से ही आंधी-पानी है। हवाओं के थपेड़ों ने बड़े बड़े वृक्षों को हिला डाला है। बिजली बंद होगई है और नगर में अंधेरा है।

घर में एक दीपक जलाया गया है।

उसकी लौ ऊपर की ओर उठ रही है। दिया भूमि का भाग है पर लौ न मालुम किसे पाने निरंतर ऊपर की ओर भागती रहती है।

लौ की भांति ही मनुष्य चेतना भी है।

शरीर भूमि पर तृप्त है पर मनुष्य में शरीर के अतिरिक्त भी कुछ है जो निरंतर भूमि से ऊपर उठना चाहता है। यह चेतना ही, यह अग्नि-शिखा ही मनुष्य का प्राण है। यह निरंतर ऊपर उठने की उत्सुकता ही उसकी आत्मा है।

यह लौ है, इसलिए मनुष्य मनुष्य है अन्यथा सब मिट्टी है। यह लौ पूरी तरह जले तो जीवन में क्रांति घटित होजाती है। यह लौ पूरी तरह दिखाई देने लगे तो मिट्टी के बीच ही मिट्टी को पार कर लिया जाता है।

मनुष्य एक दिया है। मिट्टी भी है उसमें; पर ज्योति भी है। मिट्टी पर ही ध्यान रहा तो जीवन व्यर्थ होजाता है। ज्योति पर ध्यान जाना चाहिए। ज्योति पर ध्यान जाते ही सब कुछ परिवर्तित होजाता है क्योंकि मिट्टी में ही प्रभु के दर्शन होजाते हैं।

रात्रि:
२२ मार्च १९६२

रजनीश के प्रणाम

(पुनश्‍च: आपका पत्र मिल गया है। जयपुर चलना है। मैं ५ अप्रेल की रात्रि जबलपुर-बीना पैसेंजर से निकलूँगा जो कि ६ अप्रेल को सुबह ६।। बजे बीना पहुँचती है। वहां ९।। बजे पंजाब मेल मिलेगा जो कि शाम को आगरा पहुँचाता है। आगरा से लगी हुई एक्सप्रेस जयपुर के लिए मिलती है जो कि ७ अप्रेल को सुबह ४ बजे जयपुर पहुंचायेगी। आप ५ अप्रेल को सुबह जी. टी. से निकलें और बीना पर मेरी प्रतीक्षा करें। बीना से साथ होजावेगा। एक ही असुविधा होगी कि आपको बीना पर ६-७ घंटे रुकना होगा।)


See also
Krantibeej ~ 021 - The event of this letter.
Letters to Anandmayee - Overview page of these letters.