Letter written on 24 Jun 1966

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Letterhead reads:

Acharya Rajnish on the top, with
Jivan Jagruti Kendra, 115, Napier Town, JABALPUR (M.P.) on the bottom

The letter is dated 24th June 1966, recipient is Mr R.K. Nandani (Ma Yoga Geeta ?). The salutation is his usual one of those times, "प्रिय आत्मन", or "Beloved Soul". It has been published in Ghoonghat Ke Pat Khol (घूंघट के पट खोल) as letter 16.

Acharya Rajnish

प्रिय आत्मन्,
प्रेम। आपके पत्र। धैर्य से अनुसन्धान करें। सत्य तो निकट है किन्तु अधैर्य के कारण हम उसे नहीं देख पाते हैं।

मन जब शांत होता है, और धैर्य में तो मिट ही जाता है, और तब जो शेष है, वही है सत्य।

इसलिए खोजना कम है और खोना ज्यादा है।

बीज स्वयं को खोकर सत्य बनता है। और बूंद सागर।

वही मार्ग है।

मिटना मार्ग है

मृत्यु को जो राजी है, उसके लिए अमृत के व्दार खुल ही गये।

"मैं 'के अतिरिक्त स्वयं तक पहुँचने में और कोई बाधा नहीं है।

*

वहां सबको प्रणाम।

रजनीश के प्रणाम

जबलपुर.
२४/६/१९६६

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Jeevan Jagruti Kendra, 115, Napier Town, Jabalpur (M.P.)

Letter-24-Jun-1966.jpg


See also
Ghoonghat Ke Pat Khol ~ 016 - The event of this letter.