Letter written on 27 Aug 1962

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This is one of hundreds of letters Osho wrote to Ma Anandmayee, then known as Madan Kunwar Parakh. It was written on 27th August 1962. The letterhead has a simple "रजनीश" (Rajneesh) in the top left area, in a heavy but florid font, and "115, Napier Town, Jabalpur (M.P.) in the top right, in a lighter but still somewhat florid font.

Osho's salutation in this letter is a fairly typical "प्रिय मां", Priya Maan, Dear Mom. There are a couple of the hand-written marks that have been observed in other letters: a black tick mark in the top right corner and a mirror-image number in the bottom right corner. As with some other recent letters, there are actually two numbers there, one crossed out (127) and replaced by a pink number, 129.

The letter has been published, in Bhavna Ke Bhojpatron Par Osho (भावना के भोजपत्रों पर ओशो) (2002 Diamond edition), on p 153.

In PS Osho writes: "Your letter has been received - written that you are not coming to Bombay. But I do believe that you are coming. I will be waiting after reaching."

Letters to Anandmayee 921.jpg

रजनीश

११५, नेपियर टाउन
जबलपुर (म.प्र.)

प्रिय मां,
एक मंदिर में गया था। कृष्ण की मूर्ति के सामने नृत्य होरहा था। जो थे वहां वे अपने को भूल गये थे।

एक दिन एक गांव में कुछ लोगों को शराब पिये देखा था। जो स्व को भूलाने का आनंद उन्हें था, वही आज मंदिर में भी देखा।

स्व को भूलाना मूर्च्छित होना है। इससे कोई अंतर नहीं पड़ता है कि यह भूलाना कैसे होता है। मनुष्य ने बहुत प्रकार की शराबें विकसित की हैं।

स्व को भूलाना नहीं है : स्व को पाना है। यह मूर्च्छा से नहीं, परिपूर्ण जागरुकता से होता है।

स्व-विस्मृति इलाज नहीं प्रवंचना है। भक्ति से – पर में अपने को डुबा देने से – प्रभु उपलब्ध नहीं होता है। पर में नहीं, स्व में ही गहरे उतरने से वह पाया जाता है। ईश्वर को पाने में ईश्वर की समस्त पर-धारणायें बाधा हैं।

ईश्वर की धारणा मात्र बाधा है। जो है उसे पाने को समस्त धारणायें छोड़नी पड़ती हैं।

मैं जिस क्षण पर से मुक्त हूँ, उसी क्षण चित्त से मुक्त हूँ और जिस क्षण चित्त से मुक्त हूँ उसी क्षण प्रभु को प्राप्त हूँ।

२७ अगस्त १६६२

रजनीश के प्रणाम


पुनश्च: तुम्हारा पत्र मिल गया है। लिखा है बम्बई नहीं आ रही हैं। पर मैं तो मान रहा हूँ कि आरही हैं। मैं पहुँच कर राह देखूँगा।


See also
Bhavna Ke Bhojpatron ~ 080 - The event of this letter.
Letters to Anandmayee - Overview page of these letters.