Letter written on 2 Mar 1966

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The letter is dated 2nd March 1966 and addressed to Ma Yoga Geeta. The salutation is his usual one of those times, "प्रिय आत्मन", or "Beloved Soul".

There is no pre-printed letterhead being used for this letter. It is plain paper, pure and simple. Osho has however written out his name and address in an unusual way, by adding a "ji" at the end of his name.

It is not known to have been previously published.

Letter-2-Mar-1966.jpg

प्रिय आत्मन्,
प्रेम। आप के दोनों पत्र मिले हैं। बहुत विचार में न पड़े। विचार से सत्य तक जाने का कोई मार्ग नहीं है। मार्ग हैः ध्यान। उसकी ओर जितने बढ़ेंगे, उसी मात्रा में शांति,आनंद और आत्मा की ओर गति होगी। ध्यान जब पूर्ण होता है तभी अंतस् चक्षु खुलते हैं और सत्य का साक्षात् होता है। सत्य तो सतत मौजूद है लेकिन हम अंधे हैं।

रजनीश के प्रणाम

२/३/१९६६
जबलपुर

Acharya Rajnishji
115 Napier Town
Yogesh Bhuwan
Jabalpur


See also
Letters to Ma Yoga Geeta ~ 01 - The event of this letter.