Letter written on 3 May 1967

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Letter written to Sw Chaitanya Veetaraga on 3 May 1967. It is unknown if it has been published or not.

Chaitanya Veetaraga, letter 3-May-1967.jpg

Acharya Rajnish

115, Napier Town, Yogesh Bhavan, Jabalpur (M.P.)

मेरे प्रिय,
प्रेम। पत्र मिले हैं। विचारों के पंख बिल्कुल झूठे हैं। वे दिखाई तो पड़ते है पंख, लेकिन अंततः पिंजड़ा सिद्ध होते हैं। उनसे कभी कोई उड़ नहीं सका है। हां उड़ने के सपने ही देखना हो तो बात दूसरी है ! सत्य के आकाश में उड़ने की क्षमता तो तभी आती है जब चित्त विचारों के पंख होने के भ्रम से मुक्त होजाता है। वहां सबको मेरे प्रणाम।

रजनीश के प्रणाम

३/५/१९६७


See also
Letters to Veetaraga ~ 03 - The event of this letter.