Naye Manushya Ka Dharm (नये मनुष्य का धर्म)

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धर्म यदि कुछ है, तो मेरी दृष्टि में जागने की प्रक्रिया है। धर्म न तो पूजा है, न प्रार्थना। क्योंकि सोए हुए आदमी की न पूजा का कोई अर्थ है और न प्रार्थना का। धर्म न शास्त्रों को जान लेना है, न सिद्धांतों को सीख लेना। क्योंकि सोए हुए आदमी के शास्त्रों को कंठ
notes
Available as seven chapters audio and an eight chapters e-book editions. Seven dates are known for talks given in Bombay and around Gujarat. See discussion for discourse titles, events and dates.
time period of Osho's original talks/writings
Nov 14 1967 to Oct 14 1970 + ? ** : timeline
number of discourses/chapters
8


editions