Bharat Ka Bhavishya (भारत का भविष्य)

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जवान आदमी भविष्य की तरफ देखता है। और जो कौम भविष्य की तरफ देखती है वह जवान होती है। जो अतीत की तरफ, पीछे की तरफ देखती है, वह बूढ़ी हो जाती है। यह हमारा मुल्क सैकड़ों वर्षों से पीछे की तरफ देखने का आदी रहा है। हम सदा ही पीछे की तरफ देखते हैं; जैसे भविष्य है ही नहीं, जैसे कल होने वाला नहीं है। जो बीत गया कल है वही सब-कुछ है। यह जो हमारी दृष्टि है यह हमें बूढ़ा बना देती है।
notes
Title means literally, "Future of India." Available in audio form and a partial e-book. 17 discourses on social / political themes given in Hindi in various locations probably in the late 60s, though much is unknown. See discussion for some details and a TOC.
Chapter 12 published in Ek Ek Kadam (एक एक कदम) as ch.3 (Diamond editions).
Chapters 15-17 published also in Samund Samana Bund Mein (समुंद समाना बुंद में), 1971 & 1974 editions: ch.3, 2, 4.
time period of Osho's original talks/writings
~ late 60s : timeline
number of discourses/chapters
17


editions

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Bharat Ka Bhavishya (भारत का भविष्य)

Year of publication : ≤Jun 1999
Publisher :
ISBN
Number of pages :
Hardcover / Paperback / Ebook :
Edition notes : Source: list of books from Dhyan Ke Kamal (ध्यान के कमल) (1999.06 ed.), Satya-Asatya (सत्य-असत्य) (2015 ed.).