Jansankhya Visphot (जनसंख्‍या विस्‍फोट)

From The Sannyas Wiki
Jump to: navigation, search


समाज जितना समृद्ध होता है, वह उतना ही कम बच्‍चे पैदा करता है। लेकिन दीन-दुखी-दरिद्र लोग जीवन में किसी अन्‍य मनोरंजन और सुख की सुविधा न होने से सिर्फ सेक्‍स में ही सुख ढूढ़ लेते हैं, उनके पास और कोई उपाय नहीं रहता। समृद्ध व्‍यक्ति अगर संगीत सुनता है, साहित्‍य पढ़ता है, चित्र देखता है, घूमने जाता है, पहाड़ की यात्रा भी करता है, तब उसकी शक्ति बहुत दिशाओं में बह जाती है। एक गरीब आदमी के पास शक्ति बहाने का और कोई उपाय नहीं रहता अर्थात् उसके मनोरंजन खर्चीले है, सिर्फ सेक्‍स ही ऐसा मनोरंजन है जो घर में बीबीके साथ मुफ्त उपलब्‍ध है इसलिए गरीब आदमी बच्‍चे पैदा करते चला जाता है। इस प्रकार ओशो ने इस पुस्‍तकमें जनसंख्‍या विस्‍फोट के मूल कारणों पर प्रकाश डाला है।
notes
JJK single-discourse booklet became ch.1 (of 5) of Diamond editions.
See discussion for a TOC.
JJK edition later published as ch.9 of Sambhog Se Samadhi Ki Or (संभोग से समाधि की ओर).
time period of Osho's original talks/writings
(unknown)
number of discourses/chapters
1 (JJK editions)
5 (Diamond editions)


editions

Blank.jpg

Jansankhya Visphot (जनसंख्‍या विस्‍फोट)

Year of publication : Jan 1971
Publisher : Jeevan Jagriti Kendra
ISBN
Number of pages :
Hardcover / Paperback / Ebook :
Edition notes : 3000 copies.

Jansakhya Visphot2.jpg

Jansankhya Visphot (जनसंख्‍या विस्‍फोट)

समस्या और समाधान (Samasya Aur Samadhan)

Year of publication : Jan 1973
Publisher : Jeevan Jagriti Kendra
ISBN (none)
Number of pages : 41
Hardcover / Paperback / Ebook : P
Edition notes : Second revised edition.

Jansakhya Visphot.jpg

Jansankhya Visphot (जनसंख्‍या विस्‍फोट)

Year of publication : 2005
Publisher : Diamond Books
ISBN 81-288-0968-7 (click ISBN to buy online)
Number of pages : 96
Hardcover / Paperback / Ebook : P
Edition notes :

Jansakhya Visphot.jpg

Jansankhya Visphot (जनसंख्‍या विस्‍फोट)

Year of publication : 2016
Publisher : Diamond Pocket Books
ISBN 81-288-0719-6 (click ISBN to buy online)
Number of pages : ~96
Hardcover / Paperback / Ebook : P
Edition notes : This ISBN belongs also to Bharat Ke Mahan Amar Krantikari Gopalkrishna Gokhale by another author (not Osho).