Hanse Khele Na Kare Man Bhang (हंसे खेले न करे मन भंग)

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परमात्मा अज्ञात नहीं है, यही धर्म और विज्ञान का भेद है। धर्म कहता है: जगत में तीन तरह की बातें हैं- ज्ञात, जो जान लिया गयाऋ अज्ञात, जो जान लिया जाएगा और अज्ञेय, जो न जाना गया है और न जाना जाएगा। विज्ञान कहता है: जगत में सिर्फ दो ही चीजें हैं - ज्ञात और अज्ञात। विज्ञान दो हिस्सों में बांटता है जगत को - जो जान लिया गया और जो जान लिया जाएगा। बस उस एक अज्ञेय शब्द में ही धर्म का सारा सार छुपा है। कुछ ऐसा भी है जो न जाना गया और न जाना जाएगा। क्योंकि उसका राज यह है कि उसे खोजनेवाला खो जाता है उसमें।
notes
Originally published as ch.1-4 of Maro He Jogi Maro (मरौ हे जोगी मरौ).
time period of Osho's original talks/writings
Oct 1, 1978 to Oct 4, 1978 : timeline
number of discourses/chapters
4   (see table of contents)


editions

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Hanse Khele Na Kare Man Bhang (हंसे खेले न करे मन भंग)

Year of publication : ≤1993
Publisher : Diamond Pocket Books
ISBN
Number of pages :
Hardcover / Paperback / Ebook :
Edition notes : (Source: list of Diamond books in Abhinav Dharm (अभिनव धर्म).)

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Hanse Khele Na Kare Man Bhang (हंसे खेले न करे मन भंग)

(गोरख वाणी) (Gorakh Vani)

Year of publication : 2007
Publisher : Diamond Pocket Books
ISBN 81-7182-243-6 (click ISBN to buy online)
Number of pages : 136
Hardcover / Paperback / Ebook : P
Edition notes : Back cover has another ISBN 81-7182-244-4.

table of contents

edition 2007
chapter titles
discourses
event location duration media
1 हंसिबा खेलिबा धरिबा ध्यानं 1 Oct 1978 am Buddha Hall, Poona 1h 58min audio
2 अज्ञात की पुकार 2 Oct 1978 am Buddha Hall, Poona 1h 49min audio
3 सहजै रहिबा 3 Oct 1978 am Buddha Hall, Poona 1h 50min audio
4 अदेखि देखिबा 4 Oct 1978 am Buddha Hall, Poona 1h 47min audio